बुलंद सोच, सागर।
चार वर्ष पुराने बहुचर्चित पांच लाख रुपये रिश्वत प्रकरण में विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने गुरुवार को फैसला सुनाया। न्यायालय ने तत्कालीन क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (ईपीएफओ) सतीश कुमार को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और पांच लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय के न्यायाधीश एस. हाश्मी ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। अभियोजन की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन अरुण कुमार मिश्रा ने प्रभावी पैरवी की। अर्थदंड न भरने पर 6 माह की अतिरिक्त सजा रहेगी।
रिश्वत प्रकरण की पृष्ठभूमि
यह मामला जून 2022 का है, जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) सागर ने तत्कालीन क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त सतीश कुमार को उनके सिविल लाइन स्थित सरकारी आवास पर पांच लाख रुपये की रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि सागर की बीड़ी निर्माता फर्म बीआर एंड कंपनी के संचालक अनिरुद्ध पिंपलापुरे से कुल दस लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। आरोप था कि भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं करने और प्रकरण को दबाने के बदले यह राशि मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने सत्यापन किया और योजना के तहत ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपी को रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था।

