BREAKING NEWS
2026-07-31

टीकमगढ़ में अपर कलेक्टर के रीडर के नाम 3.5 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का नामांतरण रद्द

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, टीकमगढ़।

टीकमगढ़ जिले में सरकारी जमीनों पर फर्जी तरीके से नामांतरण कर कब्जा करने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने जांच के बाद सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर के रीडर शंकर प्रसाद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी, मां और पुत्र के नाम दर्ज 3.5 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि का नामांतरण निरस्त कर उसे पुनः शासकीय अभिलेखों में दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

जांच में सामने आया कि शंकर प्रसाद श्रीवास्तव ने अपने पद और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न सरकारी जमीनों को फर्जी दस्तावेजों और नियमों की अनदेखी कर अपने तथा परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज करा लिया था। इनमें ग्राम उत्तरी कर्री और मोगनगढ़ क्षेत्र की कई शासकीय भूमि शामिल हैं।

Advertisement

बताया गया कि कुछ जमीनें वर्ष 1969-70 से शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज थीं। बाद में फर्जी आदेशों और नामांतरण के जरिए निजी नामों पर दर्ज करा ली गईं।

कलेक्टर के आदेश में उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार द्वारा अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किए गए थे। वहीं कई मामलों में भूमि के बदले दूसरी भूमि की अदला-बदली भी नियमों के विपरीत कर दी गई थी।

जांच में पाया गया कि लगभग 1.126 हेक्टेयर भूमि पहले श्रीवास्तव की मां के नाम दर्ज कराई गई थी। इसी आधार पर दूसरी शासकीय भूमि उनके पुत्र राहुल श्रीवास्तव के नाम दर्ज करा ली गई थी। बाद में इन आदेशों को भी अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया गया।

सरकारी जमीनों पर कब्जा मामले की जांच शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकारी कर्मचारी रहते हुए शंकर प्रसाद श्रीवास्तव ने प्रभाव का दुरुपयोग कर कई सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया था।

जांच के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद प्रशासन ने पाया कि नामांतरण की पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत थी।

कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने सभी विवादित आदेश निरस्त करते हुए संबंधित जमीनों को पुनः सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद जिले में सरकारी भूमि पर हुए कथित फर्जी नामांतरण और कब्जों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि इस प्रकरण के बाद ऐसे अन्य मामलों की भी जांच तेज हो सकती है, जिससे सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।