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2026-07-23

रीवा में सरकारी गोदाम से 36 लाख की पाठ्य पुस्तकें गायब, FIR दर्ज

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, रीवा।

रीवा में सरकारी स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों तक पहुंचने वाली निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण में एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पाठ्य पुस्तक निगम के गोदाम से लगभग 450 बंडल किताबें रहस्यमय ढंग से गायब मिली हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 35 से 36 लाख रुपये बताई जा रही है।
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग से लेकर भोपाल तक हड़कंप मच गया है। चोरहटा थाने में इस संबंध में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली गई है, जबकि भोपाल से पहुंची एक विशेष जांच टीम पूरे मामले की तह तक पहुंचने में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार, दो दिन पहले शासकीय विद्यालयों में निःशुल्क वितरित होने वाली पुस्तकों के वितरण में अनियमितता की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गोदाम के स्टॉक का मिलान कराने के निर्देश दिए।
जांच में सामने आया कि रिकॉर्ड में दर्ज पुस्तकों और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर था। मिलान के दौरान लगभग दो ट्रक के बराबर 450 बंडल किताबें गायब मिलीं।
सूत्रों के मुताबिक, जिन किताबों को सरकारी स्कूलों तक पहुंचना था, वे कई विद्यालयों में कभी पहुंची ही नहीं। दूसरी ओर, इन्हीं किताबों के खुले बाजार में बिकने की शिकायतों ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
जांच के दौरान गोदाम में कुछ ऐसी पुस्तकें भी मिली हैं, जिन्हें रिकॉर्ड में पहले ही वितरित या समाप्त दिखाया जा चुका था। इससे आशंका गहरा गई है कि दस्तावेजों में हेराफेरी कर सरकारी पुस्तकों की बंदरबांट की गई।
प्रारंभिक जांच में यह संभावना भी जताई जा रही है कि बदले हुए सिलेबस की पुस्तकों को बाद में गोदाम में वापस रखकर कागजी खानापूर्ति की गई हो। हालांकि, इस पहलू की पुष्टि विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल से पहुंची अधिकारियों की टीम गोदाम के स्टॉक, वितरण रजिस्टर, परिवहन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर हो सकती है।
चोरहटा थाना प्रभारी पवन शुक्ला ने बताया कि 450 बंडल किताबें गायब मिलने के मामले में एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि यह किताब घोटाला किसके इशारे पर किया गया है।

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