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सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में एक साल में दो बाघों की मौत; वन विभाग सतर्क, विशेष गश्ती दल तैनात

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, बालाघाट।

दक्षिण वन मंडल बालाघाट सामान्य के सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व में एक साल के भीतर दो बाघों की मौत के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। हाल ही में बाघ के शव मिलने के बाद विभाग ने तीन विशेष गश्ती टीमें तैनात की हैं, जो पूरे रिजर्व क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही हैं। इन टीमों द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ लंबे समय से नजर नहीं आए वन्यजीवों की भी तलाश की जा रही है।

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सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व के बहियाटिकुर सर्किल के कक्ष क्रमांक 443 में एक साल के भीतर दो बाघों की मौत हुई है। इनमें से एक बाघ की मौत आपसी संघर्ष में हुई थी। वहीं, एक बाघिन का शव नाले की बाढ़ में बहकर आया था, जिसे वन परिक्षेत्र सहायक और बीटगार्ड ने स्थाई कर्मियों के साथ मिलकर अधिकारियों को जानकारी दिए बिना जंगल के अंदर जला दिया था। इस मामले के सभी आरोपित वर्तमान में सलाखों के पीछे हैं।

29 जुलाई को बाघ का शव मिलने के बाद वन विभाग ने यहां तीन टीमें बनाकर गश्त में लगा दी हैं। प्रत्येक टीम में चार-चार वनकर्मी शामिल हैं। ये वनकर्मी इस सर्किल के अलावा पूरे सोनेवानी के जंगल में मानसून गश्ती कर रहे हैं। गश्ती के दौरान चयनित क्षेत्र में विचरण करने वाले वन्यजीवों पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त, कुछ वन्यजीव जो पिछले लंबे समय से परिक्षेत्र में नहीं दिखाई पड़ रहे हैं, उनकी भी खोज की जा रही है।

एक सूखे मृत शावक का शव भी पड़ा मिला था, जो दो से तीन दिन पुराना था। दो बाघों के बीच हुए संघर्ष में एक की मौत हो गई। एक ही सर्किल में एक साल के भीतर दो बाघों की मौत दर्ज की गई है।

कटंगी, वारासिवनी और लालबर्रा के जंगल पेंच और महाराष्ट्र की सीमा से लगे होने के कारण यहां बाघ, तेंदुए, बायसन, भालू के अलावा अन्य वन्यप्राणी अधिक संख्या में पाए जाते हैं। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2015-16 में सोनेवानी को वन्यप्राणी अनुभव क्षेत्र घोषित किया गया था। बाद में, प्रदेश सरकार ने 22 मई 2025 को इसे कंजर्वेशन रिजर्व घोषित कर दिया।

इस कंजर्वेशन रिजर्व में उप वन मंडल वन परिक्षेत्र वारासिवनी और वन परिक्षेत्र लालबर्रा आते हैं। इन तीनों परिक्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 16319.58 हेक्टेयर है। इन तीनों परिक्षेत्र में बाघों की संख्या अधिक होने से उन्हें क्षेत्र कम पड़ने लगा है, जिसके कारण बाघ खेत और आबादी वाले क्षेत्रों में विचरण करते देखे जा रहे हैं। इससे बाघों में आपसी संघर्ष बढ़ रहा है।

एसडीओ यशपाल मेहरा ने बताया कि सोनेवानी के बहियाटिकुर में बाघ की आपसी संघर्ष में मौत हुई है। बाघ की मौत के बाद से लगातार टीमें गश्त कर रही हैं और गश्त के दौरान चयनित क्षेत्र में वन्यजीवों पर भी निगरानी रख रही हैं।