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2026-07-29

उज्जैन महाकाल मंदिर की वेबसाइट सरकारी मानकों पर खरी नहीं

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, उज्जैन।

श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने हाल ही में एआई आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली के लिए भारत सरकार का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार प्राप्त किया है। इसके बावजूद, समिति की आधिकारिक वेबसाइट भारत सरकार की जीआईजीडब्ल्यू 3.0 (गाइडलाइन फॉर इंडियन गवर्नमेंट वेबसाइट) के कई अनिवार्य मानकों का पालन नहीं कर रही है। देश-विदेश के भक्तों को पारदर्शी ऑनलाइन सुविधा तथा उनके डिजिटल डेटा की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारियां स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि ऐसी स्थिति में वेबसाइट की विश्वसनीयता और डिजिटल सुशासन के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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श्रद्धालुओं की डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताएं

श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर समिति भस्म आरती सहित अन्य सेवाओं के लिए भक्तों से आधार कार्ड और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज अपलोड कराती है। ऐसी स्थिति में वेबसाइट पर डेटा संरक्षण, गोपनीयता नीति, डेटा संग्रहण की अवधि और सुरक्षा संबंधी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। वेबसाइट पर आने वाले लोगों के इन सवालों का मंदिर समिति के पास कोई जवाब नहीं है। नईदुनिया ने श्रद्धालुओं द्वारा उठाए गए इन महत्वपूर्ण सवालों से मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक और मंदिर की आईटी शाखा के प्रभारी अधिकारी दीपक परमार को अवगत कराते हुए स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया, लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

जीआईजीडब्ल्यू 3.0 नियम एवं अनिवार्यता

भारत सरकार ने शासकीय वेबसाइटों को सुरक्षित, पारदर्शी तथा उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए जीआईजीडब्ल्यू 3.0 मानक तय किए हैं। महाकाल मंदिर समिति शासन के अधीन है और इसकी व्यवस्थाओं का संचालन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है। इसलिए मंदिर की वेबसाइट के लिए इन नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यह एक संपूर्ण नियमावली है, जो वेबसाइट को पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाती है। जानकारों का मानना है कि महाकाल मंदिर के लिए इस प्रकार के मानकों का पालन करना अत्यंत अनिवार्य है, क्योंकि यहां भस्म आरती, संध्या आरती, शयन आरती और प्रोटोकॉल दर्शन आदि के लिए प्रतिदिन हजारों भक्तों का आधार कार्ड और फोटो आईडी लिया जाता है।

आरती बुकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी

महाकाल मंदिर में भस्म आरती की संपूर्ण दर्शन व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। पहले भक्तों को मंदिर के काउंटर से 300 ऑफलाइन अनुमति मिलती थी, लेकिन अब उन्हें भी ऑनलाइन कर दिया गया है। समिति ऑनलाइन 400 सीट की बुकिंग दो माह पहले करती है, जबकि 300 सीटों की तत्काल बुकिंग एक दिन पहले की जाती है। मंदिर की वेबसाइट पर भस्म आरती के इन दोनों प्रारूपों की भक्तों को कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। संध्या और शयन आरती की बुकिंग व्यवस्था में भी पारदर्शिता नहीं है। श्रद्धालुओं ने जब इन सवालों के जवाब ढूंढना शुरू किए, तो उन्हें बड़ी खामियां सामने आईं।

अनुत्तरित प्रश्न

अधिकारियों के पास निम्नलिखित महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं हैं:
1. क्या महाकाल मंदिर समिति की वेबसाइट गाइडलाइन फॉर इंडियन गवर्नमेंट वेबसाइट 3.0 के अनुरूप है?
2. क्या डेटा सुरक्षा में कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम इंडिया के मानकों का पालन हो रहा है?
3. मंदिर समिति ने यह वेबसाइट शासन की किसी एजेंसी से बनवाई है या किसी निजी वेंडर से?
4. वेबसाइट का सर्वर डोमेन और डेटा किसके नियंत्रण में है?
5. क्या वेबसाइट का सुरक्षा ऑडिट हुआ है?