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2026-08-04

उज्जैन में एक दशक बाद हाउसिंग बोर्ड की वापसी, विक्रम उद्योगपुरी में 1250 नए आवास का प्रस्ताव

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, उज्जैन।

उज्जैन के तेजी से उभरते औद्योगिक केंद्र विक्रम उद्योगपुरी में जल्द ही 1250 आवासीय इकाइयों की एक नई कॉलोनी विकसित होने की संभावना है। मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) ने इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को स्वीकृति हेतु भेजा है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद उज्जैन में लगभग एक दशक बाद हाउसिंग बोर्ड की कोई नई आवासीय योजना धरातल पर उतरेगी।

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यह योजना ऐसे समय में लाई गई है जब विक्रम उद्योगपुरी प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में से एक बन चुका है। यहां अब तक 135 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इस क्षेत्र में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश से लगभग 25 हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

अमूल और पेप्सीको सहित 20 से अधिक उद्योगों में उत्पादन शुरू होने के बाद कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवास की मांग तेजी से बढ़ी है।

प्रस्तावित कॉलोनी में विभिन्न आय वर्गों के लिए आवास विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य केवल मकान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि एक उद्योग आधारित आधुनिक आवासीय क्षेत्र तैयार करना है, जिससे कर्मचारियों को कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा मिल सके। इससे उद्योगों को भी कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार और आधारभूत सुविधाएँ

विक्रम उद्योगपुरी के विस्तार की प्रक्रिया भी समानांतर चल रही है। 488 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि पर विस्तार प्रस्तावित है, जहां अल्केम लेबोरेट्रीज, अडानी समूह और वॉल्वो आयशर जैसी बड़ी कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, 360 एकड़ में विकसित हो रहे मेडिकल डिवाइस पार्क में भी औद्योगिक इकाइयों को भूखंड दिए गए हैं।

औद्योगिक विकास को गति देने के लिए आधारभूत सुविधाओं पर भी तेजी से काम हो रहा है। उद्योगपुरी परिसर में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से एक वर्किंग वूमेन हॉस्टल बनाया जा रहा है, जिसमें करीब 1500 महिला कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था होगी। ऐसे में हाउसिंग बोर्ड की यह नई योजना औद्योगिक विकास की अगली कड़ी मानी जा रही है।

पुरानी आवासीय योजनाओं की स्थिति

उज्जैन में वर्ष 2015 के बाद हाउसिंग बोर्ड कोई नई बड़ी आवासीय योजना शुरू नहीं कर पाया था। शिवांगी परिसर योजना न्यायालयीन विवाद में उलझ गई थी, जबकि अन्य प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सके।

47.71 करोड़ रुपये की शिवांगी परिसर योजना भूमि अधिग्रहण विवाद में फंस गई थी। इंदौर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई 23 जनवरी 2026 को प्रस्तावित है। फैसले के बाद ही 29 निवेशकों और बोर्ड की इस बहुचर्चित परियोजना के भविष्य पर तस्वीर साफ हो सकेगी।

राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए 196 आवासों वाली कॉलोनी का निर्माण समय सीमा से एक साल विलंब से चल रहा है। फिलहाल 124 मकान पूर्ण हो चुके हैं। पूरी परियोजना जनवरी 2027 में पूरी होने के बाद गुणवत्ता परीक्षण, बिजली-पानी कनेक्शन, सड़क, हैंडओवर और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर ही आवासों का आवंटन संभव होगा। इस कारण सरकारी कर्मचारियों का इंतजार अभी भी जारी रहेगा।