बुलंद सोच, विदिशा।

तहसील विदिशा की ग्राम पंचायत कराखेड़ी में श्मशान की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को एक ग्रामीण की मृत्यु के बाद बारिश से बचने के लिए ग्रामीणों को टीन की चादरों और लकड़ी के खंभों से अस्थायी शेड बनाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा।
श्मशान घाट के लिए प्रस्तावित जमीन को लेकर चल रहे विवाद के कारण कई सालों से चबूतरा और शेड का निर्माण अटका हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार को गांव के 80 वर्षीय रघुवीर दांगी का निधन हो गया था। सुबह हल्की वर्षा का दौर भी चल रहा था, जिसके कारण उन्हें गांव से लगे एक खेत में वर्षा से बचाव के लिए लकड़ी के खंभे गाड़कर ऊपर टीन बिछानी पड़ी, इसके बाद चिता को मुखाग्नि दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में शांतिधाम नहीं होने की स्थिति में बारिश के दिनों में यह स्थिति कई बार बनती है।
ग्राम पंचायत कराखेड़ी के सरपंच प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि गांव में जिस जगह अंतिम संस्कार होते हैं, वह गांव के ही एक व्यक्ति की निजी जमीन है। साल 2023 में पंचायत के माध्यम से श्मशान में पक्का चबूतरा और एक टीनशेड निर्माण स्वीकृत कराया गया था, लेकिन जमीन मालिक किसान ने यहां पक्का निर्माण कराने का विरोध कर दिया, तब से यह निर्माण नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि जमीन मालिक किसान अंतिम संस्कार के लिए किसी को नहीं रोकता, लेकिन वह अपनी जमीन पर किसी तरह का सरकारी निर्माण नहीं होने देना चाहता।
सरपंच प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने तहसीलदार से दूसरी सरकारी जमीन मांगी है, ताकि वहां श्मशान शेड का निर्माण कराया जा सके। उनका कहना है कि गांव में सरकारी जमीन तो उपलब्ध है, लेकिन उस पर कब्जे हैं, ऐसे में प्रशासन ही जमीन खाली करवाकर पंचायत को सौंप सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी खुले में अंतिम संस्कार होता है, और शेड नहीं होने के कारण बारिश के दौरान दिक्कत आती है, जब पानी बरसता है तो लोगों को एक अस्थायी शेड बनाने के लिए सामान ले जाना पड़ता है, तब जाकर उसके नीचे चिता जलती है।
वायरल वीडियो और प्रशासनिक कार्रवाई
शनिवार को गांव में अस्थायी शेड के नीचे हुए अंतिम संस्कार का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हो गया। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि बारिश के दौरान ग्रामीण एक अस्थाई शेड में अंतिम संस्कार कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन तुरंत अलर्ट हो गया।
तहसीलदार प्रीति पंथी और विदिशा जनपद पंचायत सीईओ गगन वाजपेयी गांव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पंचायत के सचिव सहित सरपंच से पूरी जानकारी ली। तहसीलदार पंथी का कहना है कि जहां अंतिम संस्कार होता है, वह निजी जमीन बताई जा रही है। पंचायत में सरकारी जमीन की उपलब्धता को लेकर पटवारी से रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने बताया कि पता चला है कि पहले श्मशान के लिए जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन रास्ता विवाद के कारण वहां श्मशान नहीं बन सका।
तहसीलदार पंथी ने कहा कि सोमवार को इस मामले में गांव जाकर ही पूरी जांच करेंगे। उन्होंने शेड निर्माण को लेकर निजी जमीन मालिक से भी बात करने का प्रयास करने की बात कही।
जिलेभर में मुक्तिधाम का अभाव
जिले में हर साल बारिश के समय इस तरह के खुले में अंतिम संस्कार के फोटो और वीडियो सामने आते हैं। हर गांव में शांतिधाम बनाने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी लगी हुई हैं। उनके निर्देश पर दो साल पहले ग्रामीण यांत्रिकी विभाग ने पूरे जिले में एक सर्वे किया था, जिसमें 177 गांवों में शांतिधाम नहीं पाए गए थे। वहीं, 237 गांवों में शांतिधाम जर्जर मिले थे, इसके अलावा 724 गांवों के शांतिधाम में पहुंच मार्ग बनना थे।
इसके लिए बजट भी मांगा गया था, लेकिन इसके बाद राज्य सरकार ने पांचवें वित्त और मनरेगा में प्रावधान कर शांतिधाम बनाने का रास्ता साफ कर दिया था। हालांकि, जमीन विवाद और कुछ अन्य कारणों के चलते दो साल बाद भी कई गांवों में न तो शांतिधाम बन पाए और न ही पहुंच मार्ग व्यवस्थित हो पाए। जिसके कारण कई गांव ऐसे हैं, जहां बारिश के दौरान कराखेड़ी जैसे ही खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार होता है।
जिला पंचायत अध्यक्ष गीता कैलाश रघुवंशी का कहना है कि वह पिछले दो साल से गांवों में पक्के मुक्तिधाम बनाने के मुद्दे को उठा रही हैं। इसके लिए उन्होंने सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक मुलाकात की। इसी के बाद सरकार ने मनरेगा से मुक्तिधाम के चबूतरे और शेड निर्माण तथा पांचवें वित्त से मुक्तिधाम पहुंच मार्ग बनवाने की व्यवस्था दी थी, लेकिन जिले में जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। जिसके चलते आज भी कई गांवों में मुक्तिधाम नहीं बन पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत विभाग के अधिकारी राज्य सरकार की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं।

