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2026-08-03

कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के किसान नेता ने कर्नाटक से एक लाख करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

कावेरी नदी के पानी को लेकर दक्षिण भारत के दो राज्यों तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद लगातार जारी है।
इस बीच, तमिलनाडु के किसान संगठन के नेता अय्या कन्नू ने सोमवार को कर्नाटक से पानी छोड़ने और किसानों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को हर महीने तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।
किसान नेता अय्या कन्नू ने कहा कि अभी भी कर्नाटक में 80 टीएमसी से ज्यादा पानी मौजूद है। लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने से इनकार कर दिया।
उन्होंने बताया कि दो दिन पहले केरल में हुई भारी बारिश के बाद पानी तमिलनाडु पहुंचा है। इस पानी को भवानीसागर बांध की ओर भेजा जा सकता है, लेकिन राज्य के नेताओं ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
अय्या कन्नू ने दावा किया कि अब कर्नाटक अपने लोगों और राज्य को बचाने के लिए 25,000 क्यूसेक पानी छोड़ रहा है। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से अपील की कि वह सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के खिलाफ मुकदमा दायर करें और एक लाख करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करें। उन्होंने कहा कि यह रकम किसानों को दी जानी चाहिए।
इससे पहले, बीते शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया कि वह अपने हिस्से के पानी के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। राज्य के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद अब कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।

कावेरी जल विवाद का इतिहास

कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
दोनों राज्यों के बीच दशकों से इस बात को लेकर विवाद रहा है कि नदी का पानी किस अनुपात में बांटा जाए। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया, जो जरूरत के अनुसार पानी छोड़ने के निर्देश देता है।
हालांकि, कम बारिश या जलाशयों में पानी कम होने की स्थिति में यह मुद्दा अक्सर विवाद का कारण बन जाता है।

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कर्नाटक में सर्वदलीय बैठक

रविवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आधिकारिक आवास पर सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और सरकार में मंत्री शामिल हुए।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि सरकार और वह स्वयं कावेरी मामले में राज्य के लोगों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति में राज्य के हितों की सुरक्षा की जाएगी।
डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक अभी भी सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। राज्य में अनुमानित बारिश का केवल करीब 30-35 फीसदी ही बारिश हुई है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि जब तक सरकार दिशा-निर्देश जारी नहीं करती, तब तक वे धैर्य बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने बताया कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है।
उन्होंने यह भी बताया कि कबिनी जलाशय में 24,000 क्यूसेक पानी आ रहा है, जबकि कृष्णा राजा सागर (केआरएस) जलाशय में 22,000 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। उन्होंने कहा कि कल दोपहर बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलाशय से पानी छोड़ा गया।
डीके शिवकुमार ने कहा कि सभी दलों ने सरकार के इस फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि जब भाजपा नेताओं ने केआरएस बांध का दौरा किया तो उन्होंने भी स्थिति को समझा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सभी कन्नड़ संगठनों से बात करेंगे और उनसे बंद का आयोजन न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह फैसला सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है।