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2026-08-03

आरटीआई कार्यकर्ता ने अभिजीत दीपके, कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ शिकायतें कीं

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, सूरत।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार गुजरात के सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने उनके परिवार की संपत्ति, पार्टी की फंडिंग और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर तीन अलग-अलग सरकारी एजेंसियों से शिकायत की है। तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है।

अमित तिवारी का कहना है कि अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) में जूनियर इंजीनियर (जेई) के पद पर कार्यरत थे। तिवारी के दावे के अनुसार, इस पद पर औसतन 60 से 65 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। उन्होंने सवाल उठाया है कि इतनी आय में परिवार ने अपने बच्चों को अमेरिका जैसे महंगे देश में पढ़ाई के लिए कैसे भेजा। तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार से भगवानराव दीपके और उनके परिवार की आय और संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

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अमित तिवारी ने चुनाव आयोग को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि कॉकरोच जनता पार्टी खुद को राजनीतिक संगठन के रूप में पेश कर रही है और लोगों से चंदा भी जुटा रही है। तिवारी का कहना है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक दल की तरह काम करता है, तो उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। तिवारी ने चुनाव आयोग से यह जांच करने की मांग की है कि क्या सीजेपी बिना पंजीकरण के राजनीतिक गतिविधियां चला रही है, और यदि ऐसा है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

आरटीआई कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) को भी शिकायत भेजी है। उन्होंने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की ओर से सीजेपी को दिए जाने वाले 1 करोड़ रुपये के फंड का जिक्र करते हुए इस पूरे लेनदेन की जांच की मांग की है। तिवारी ने यह भी मांग की है कि यदि संबंधित कानून लागू होते हैं, तो इस राशि पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूले जाने के पहलू की भी जांच की जाए।

अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में आंदोलन नीट पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रित था और उसे व्यापक समर्थन मिला था। हालांकि, बाद में आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी दिवंगत मां और अन्य नेताओं को लेकर कथित तौर पर अभद्र टिप्पणियां की गईं, जो लोकतांत्रिक विरोध की मर्यादा के अनुरूप नहीं थीं।

पिछले कुछ महीनों में देश की राजनीति में अभिजीत दीपके नामक 30 वर्षीय युवा और उनकी बनाई कॉकरोच जनता पार्टी का नाम तेजी से उभरा है। उन्होंने देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलन की अगुवाई की है। नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक सड़कों पर उतरे अभिजीत दीपके अब राष्ट्रीय मीडिया और राजनीति के केंद्र में हैं।

अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से संबंधित एक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन रणनीतिकार हैं। मई 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक व्यंग्यात्मक मंच बनाया गया था। यह मंच देखते ही देखते देश के लाखों बेरोजगार युवाओं और ‘जेन-जी’ का समर्थन पाकर उनकी मांगों को मजबूती से उठाने लगा।

अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी सीजेपी ने हाल ही में देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक धरना दिया। यह धरना नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के विरोध में देश भर के छात्रों द्वारा सड़कों पर उतरने के बाद दिया गया था। 20 जुलाई को छात्रों ने ‘संसद चलो’ मार्च निकाला, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी झड़प हुई। छात्रों के भारी दबाव के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। दीपके ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि छात्रों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो देश भर में फिर से बड़ा शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया जाएगा। जैसे-जैसे सीजेपी का दायरा बढ़ा, यह संगठन कानूनी और वित्तीय विवादों में भी घिर गया है।