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2026-07-23

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: स्कूलों द्वारा APAAR ID बनाना प्रतिबंधित, माता-पिता की सहमति अनिवार्य

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भुवनेश्वर।

सर्वोच्च न्यायालय ने APAAR ID को लेकर एक सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी स्कूल स्वयं बच्चों की अपार आईडी नहीं बना सकता। इस प्रक्रिया के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है।

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याचिका का आधार

यह मामला तब सामने आया जब भुवनेश्वर के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता रोहित आनंद दास से APAAR ID बनाने के लिए सहमति मांगी गई। सहमति पत्र में इंकार करने या स्वीकृति देने का कोई विकल्प मौजूद नहीं था। इसके विरोध में, माता-पिता ने ओडिशा हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

सहमति पत्र में विकल्प की आवश्यकता

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि सरकार APAAR ID को स्वैच्छिक बता रही है, परंतु सहमति पत्र में मना करने का विकल्प नहीं है। आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से निजता प्रभावित हो सकती है। उनका कहना था कि केवल बाद में सहमति वापस लेने का विकल्प पर्याप्त नहीं है, बल्कि शुरू से ही मना करने का अधिकार भी होना चाहिए।

सरकार का पक्ष

केंद्र और राज्य सरकार ने अदालत में बताया कि APAAR ID पूरी तरह से स्वैच्छिक है। माता-पिता चाहें तो सहमति न दें और बाद में सहमति वापस भी ले सकते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि APAAR ID में छात्र की ऊंचाई और वजन जैसी जानकारी भी दर्ज की जा सकती है, इसी वजह से नाबालिग छात्रों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य रखी गई है।

छात्रों के अधिकार

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि यदि कोई छात्र APAAR ID नहीं बनवाता है, तो उसे प्रवेश, परीक्षा में पंजीकरण, मार्कशीट, प्रमाण पत्र या किसी अन्य शैक्षणिक सुविधा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

APAAR ID क्या है?

अपार आईडी (Automated Permanent Academic Account Registry) भारत सरकार की ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ पहल के तहत प्रत्येक छात्र को दी जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल छात्र पहचान है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) की अवधारणा के अनुरूप विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्र के पूरे शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है।

योजना के लाभ संबंधी सरकारी दावे

सरकार और सीबीएसई का कहना है कि APAAR ID छात्रों की सुविधा के लिए बनाई गई है। इसका उद्देश्य छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना है ताकि भविष्य में उन्हें बार-बार दस्तावेज जमा न करने पड़ें। सरकार का दावा है कि यह योजना पूरी तरह छात्रों के हित में है और इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और आसान बनेगी।

योजना से जुड़ी चिंताएं

याचिकाकर्ताओं और कई विशेषज्ञों ने इस योजना को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि बच्चों का इतना बड़ा डिजिटल डेटा एक जगह इकट्ठा होने से डेटा लीक होने का खतरा बढ़ सकता है। यदि किसी कारणवश डेटा का गलत इस्तेमाल होता है, तो बच्चों की निजता प्रभावित हो सकती है। इसके अतिरिक्त, कई माता-पिता का मानना है कि यदि APAAR ID को अनिवार्य बना दिया गया, तो बिना आईडी वाले बच्चों को शिक्षा और परीक्षाओं में समस्याएँ आ सकती हैं।