बुलंद सोच, मुंबई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में स्वयंभू बाबा अशोक खरात के फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस जांच ने लोगों की आस्था के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये के खेल को उजागर किया है। जांच में सामने आया है कि मामूली बाजारू सामान को चमत्कारी और दिव्य बताकर श्रद्धालुओं से लाखों रुपये वसूले जाते थे।
ठगी का तरीका और वस्तुओं की बिक्री
ईडी के अनुसार, अशोक खरात और उसके सहयोगियों ने लोगों की बीमारियों, पारिवारिक परेशानियों और आर्थिक संकट का डर दिखाकर ठगी का एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था। श्रद्धालुओं को बताया जाता था कि उनकी मुश्किलों की वजह ग्रहों का प्रकोप और नकारात्मक शक्तियां हैं। इसके बाद उन्हें महंगे अनुष्ठान कराने और विशेष पूजा कर ‘पवित्र’ बताई गई वस्तुएं खरीदने के लिए तैयार किया जाता था।
ईडी की जांच में शहद की बिक्री को लेकर सबसे हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। बाजार में 300 रुपये से 500 रुपये प्रति लीटर में मिलने वाले सामान्य शहद को ‘दिव्य गुफा का शहद’ बताकर सात लाख रुपये प्रति लीटर तक में बेचा जाता था।
श्रद्धालुओं से दावा किया जाता था कि यह शहद दुर्लभ है, इसमें असाधारण औषधीय और आध्यात्मिक शक्तियां हैं और इसके सेवन से गंभीर बीमारियां तक ठीक हो सकती हैं। इसी दावे के भरोसे लोगों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। ईडी का मानना है कि यह ठगी का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला तरीका था।
जांच में यह भी सामने आया कि करीब एक-एक हजार रुपये कीमत वाली अंगूठियों का जोड़ा 2.62 लाख रुपये में बेचा गया। ईडी के दस्तावेजों के मुताबिक, साधारण सामग्री और नकली पुखराज से बनी इन अंगूठियों को चमत्कारी बताकर लाखों रुपये वसूले गए।
पीड़ित राजेंद्र नानासाहेब भागवत का बयान
ईडी के सामने दर्ज बयान में पीड़ित राजेंद्र नानासाहेब भागवत ने बताया कि परिवार की समस्याओं और व्यापार में नुकसान के चलते वह बाबा के संपर्क में आए थे। बाबा ने उन्हें डराया कि उनके ऊपर ग्रहों का गंभीर दोष है और यदि तुरंत उपाय नहीं किया गया तो परिवार पूरी तरह बर्बाद हो सकता है।
इसके बाद उन्हें विशेष पूजा कर ‘पवित्र’ बताई गई पुखराज और हीरे की अंगूठियां खरीदने की सलाह दी गई। दावा किया गया कि इन अंगूठियों से घर में सुख-समृद्धि आएगी और आर्थिक संकट दूर हो जाएगा। इस भरोसे में आकर भागवत परिवार ने 2.62 लाख रुपये नकद देकर अंगूठियों का जोड़ा खरीद लिया।
बाद में जांच में पता चला कि इन अंगूठियों में लगे रत्नों की वास्तविक कीमत करीब एक-एक हजार रुपये ही थी। जांच एजेंसी का दावा है कि ऐसे कई श्रद्धालु इसी तरह की ठगी का शिकार हुए।
अन्य वस्तुओं में भी ठगी
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बाजार में करीब 100 रुपये किलो मिलने वाले साधारण इमली के बीजों को ‘दुर्लभ दिव्य बीज’ बताकर 10 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक में बेचा जाता था। लोगों को विश्वास दिलाया जाता था कि इन बीजों को घर में रखने से धन की वर्षा होगी, व्यापार चमकेगा और दुर्भाग्य दूर हो जाएगा।
ईडी के अनुसार, 500 रुपये से पांच हजार रुपये कीमत वाले सामान्य रत्नों और पत्थरों को भी ग्रह दोष दूर करने वाला चमत्कारी उपाय बताकर लाखों रुपये में बेचा जाता था। श्रद्धालुओं को विश्वास दिलाया जाता था कि इन वस्तुओं के इस्तेमाल से जीवन की हर समस्या दूर हो जाएगी।
आश्रम संचालन और ठगी के तरीके
बाबा के पूर्व कार्यालय सहायक धीरज नितिन जाधव ने भी ईडी को दिए बयान में कई अहम खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक, आश्रम में बेचे जाने वाले सभी रत्न, पत्थर, शहद और अन्य सामान स्थानीय बाजार से बेहद सस्ते दामों में खरीदे जाते थे।
बाद में उन पर विशेष पूजा और तंत्र-मंत्र का दिखावा कर उन्हें ‘पवित्र’ और ‘दिव्य’ बताकर श्रद्धालुओं को कई गुना कीमत पर बेच दिया जाता था।
धीरज ने यह भी बताया कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं को प्रभावित करने के लिए प्लास्टिक के सांप, शेर की नकली मूर्तियां और अन्य कृत्रिम सामान का इस्तेमाल किया जाता था। धुएं, रोशनी और खास माहौल के जरिए लोगों को यह एहसास कराया जाता था कि वहां कोई अलौकिक शक्ति मौजूद है। इसी माहौल का फायदा उठाकर श्रद्धालुओं को महंगे अनुष्ठान कराने और तथाकथित दिव्य वस्तुएं खरीदने के लिए तैयार किया जाता था।
ईडी की आगे की कार्रवाई
जांच एजेंसी का कहना है कि इस तरह जुटाई गई रकम को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजकर उसके असली स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई। ईडी ने अदालत में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अपनी जांच रिपोर्ट पेश कर दी है।
अब एजेंसी अशोक खरात और उसके सहयोगियों की अन्य बेनामी संपत्तियों तथा बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि इस ठगी से अर्जित संपत्ति का पता लगाकर उसे जब्त किया जा सके।

