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2026-08-03

कावेरी जल विवाद: मुख्यमंत्री शिवकुमार के आवास पर सर्वदलीय बैठक

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच,

तमिलनाडु के साथ कावेरी जल विवाद के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आधिकारिक आवास पर एक सर्वदलीय बैठक जारी है। इस बैठक में मुख्यमंत्री शिवकुमार, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और बसवराज बोम्मई, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. वीरप्पा मोइली और कर्नाटक सरकार के मंत्री एमबी पाटिल उपस्थित थे। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद भी बैठक में मौजूद थे। इसके अतिरिक्त, उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर, केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना और शोभा करंदलाजे, राज्य के मंत्री रामलिंगा रेड्डी, केजे जॉर्ज और कृष्णा बायरे गौड़ा भी शामिल हुए। दिल्ली में राज्य सरकार के विशेष प्रतिनिधि टीबी जयचंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी, महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक का हिस्सा थे।

मुख्यमंत्री शिवकुमार का बयान

कावेरी जल विवाद पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि सरकार और वह स्वयं कावेरी मामले में राज्य के लोगों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर परिस्थिति में राज्य के हितों की सुरक्षा की जाएगी। डीके शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक अभी भी सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। राज्य में अनुमानित बारिश का केवल लगभग 30-35 प्रतिशत ही हुआ है। उन्होंने किसानों से अपील की कि जब तक सरकार दिशा-निर्देश जारी नहीं करती, तब तक वे धैर्य बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने राज्य को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि कबिनी जलाशय में 24,000 क्यूसेक पानी आ रहा है, जबकि कृष्णा राजा सागर (केआरएस) जलाशय में 22,000 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कल दोपहर बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलाशय से पानी छोड़ा गया। डीके शिवकुमार ने बताया कि सभी दलों ने सरकार के इस फैसले का सर्वसम्मति से समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा नेताओं ने केआरएस बांध का दौरा किया, तो उन्होंने भी स्थिति को समझा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह सभी कन्नड़ संगठनों से बात करेंगे। उन्होंने संगठनों से बंद का आयोजन न करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है।

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कावेरी जल विवाद: पृष्ठभूमि

कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। दोनों राज्यों के बीच दशकों से इस बात को लेकर विवाद रहा है कि नदी का पानी किस अनुपात में बांटा जाए। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था और बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया, जो आवश्यकतानुसार पानी छोड़ने के निर्देश देता है। हालांकि, कम बारिश या जलाशयों में पानी कम होने की स्थिति में यह मुद्दा अक्सर फिर से विवाद का कारण बन जाता है। अब तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले से यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के अगले कदम और दोनों राज्यों के रुख पर पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।

तमिलनाडु सरकार का रुख

इससे पहले शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट किया कि वह अपने हिस्से के पानी के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। राज्य के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद अब कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।