बुलंद सोच, भोपाल।
राजधानी भोपाल में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। पिछले 48 घंटे में लगभग 3 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे मौसम सुहाना हो गया और लोगों को गर्मी-उमस से राहत मिली।
अच्छी बारिश का असर बड़े तालाब पर भी दिखाई दिया है, जहां जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। कैचमेंट क्षेत्र में हुई अच्छी बारिश से भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर बढ़कर 1659.60 फीट पर पहुंच गया है।
बड़े तालाब का फुल टैंक लेवल (एफटीएल) 1666.80 फीट है और यह अभी भी एफटीएल से 7.20 फीट नीचे है। विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल पेयजल को लेकर स्थिति संतोषजनक है, लेकिन तालाब को पूरी क्षमता तक भरने के लिए आने वाले दिनों में लगातार अच्छी बारिश की आवश्यकता होगी।
वर्षा कोटा और मौसम पूर्वानुमान
जुलाई माह का सामान्य वर्षा कोटा अभी पूरा नहीं हो पाया है। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई में भोपाल का सामान्य वर्षा कोटा 14.74 इंच है, जबकि अब तक 9.53 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।
महीने का औसत पूरा करने के लिए अभी 5.21 इंच और बारिश की जरूरत है। पूरे मानसून सीजन में अब तक कुल 19.4 इंच वर्षा हो चुकी है।
प्रदेश के ऊपर सक्रिय मानसूनी ट्रफ और लगातार मिल रही नमी के कारण मौसम विभाग ने भोपाल सहित कई जिलों में अगले 24 से 48 घंटे तक तेज से भारी बारिश की संभावना जताई है। इसी के चलते राजधानी सहित 50 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
पुराने शहर में हादसा
लगातार हो रही बारिश के बीच पुराने शहर में एक बड़ा हादसा टल गया। थाना कोतवाली के सामने स्थित लगभग 80 से 90 साल पुराने जर्जर मकान का अगला हिस्सा देर रात अचानक भरभराकर गिर गया।
मकान का छज्जा भी सड़क पर आ गिरा, जिसकी चपेट में आने से एक युवक घायल हो गया। उसके हाथ और पैर में चोटें आई हैं।
घटना के समय मकान के अंदर महिलाएं और बच्चे मौजूद थे। छज्जा गिरने के साथ ही एक युवक भी नीचे आ गिरा, जिसे स्थानीय लोगों ने तुरंत बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात और बारिश के कारण सड़क पर आवाजाही कम थी। यदि यही हादसा दिन के समय होता, तो कई लोग इसकी चपेट में आ सकते थे। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुराने और जर्जर भवनों का सर्वे कर समय रहते मरम्मत या कार्रवाई की मांग की है।
सड़कों की बदहाली
बारिश ने शहर की बदहाल सड़कों की पोल भी खोल दी है। खासकर जिन मार्गों पर मेट्रो परियोजना का निर्माण चल रहा है, वहां लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई दिखाई नहीं दे रही, जिससे दोपहिया वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। सड़कों पर फैली मिट्टी कीचड़ में बदल गई है और कई जगह वाहन फिसल रहे हैं।
अल्पना तिराहा, काजी कैंप, डीआईजी बंगला, करोंद और रायसेन रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। कई जगह सड़क निर्माण के चलते भी लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
एमपी नगर के कुछ क्षेत्रों में गड्ढे इतने ज्यादा हो गए हैं कि लगातार पानी भरा रहने से लोग परेशान हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक समझ नहीं पा रहे हैं कि गड्ढा कितना गहरा है, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन अकादमी से आईएचएम तक का सड़क निर्माण कार्य भी लोगों की परेशानी का कारण बना हुआ है।
तापमान में गिरावट और उम्मीदें
लगातार हो रही बारिश से तापमान में गिरावट आई है और उमस से राहत मिली है। मौसम विभाग का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मानसून इसी तरह सक्रिय रहा, तो न केवल जुलाई का वर्षा कोटा पूरा होने की संभावना है, बल्कि बड़े तालाब का जलस्तर भी तेजी से बढ़ेगा।
लोगों को उम्मीद है कि बारिश के साथ-साथ शहर की जर्जर सड़कों की भी जल्द मरम्मत होगी, ताकि राहत के इस मौसम में सफर मुसीबत न बने।

