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2026-08-14

भोपाल जिला अदालत में 46 जजों के पद खाली, 1.50 लाख मामले लंबित

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की जिला अदालत में जजों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण न्याय की रफ्तार धीमी हो गई है। वर्तमान में यहां लंबित मुकदमों का आंकड़ा 1.50 लाख के करीब पहुंच गया है। जिला अदालत में जजों के 112 स्वीकृत पदों में से केवल 66 जज ही पदस्थ हैं, जिससे 46 पद खाली पड़े हैं। इस कमी के कारण लंबित मामलों की संख्या 1,49,998 तक पहुंच गई है। जजों की कमी के चलते प्रत्येक अदालत पर औसतन 4 से 6 हजार मामलों का भारी बोझ है। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालतों की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां एक दिन में लगभग 100 मुकदमों पर सुनवाई करनी पड़ती है। पेंडेंसी का आलम यह है कि 20 प्रतिशत से अधिक मामले 5 से 10 साल या उससे भी अधिक पुराने हो चुके हैं।

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कोर्टरूम का अभाव

हैरानी की बात यह है कि यदि शासन स्तर पर खाली पड़े 46 पदों को भर भी दिया जाए, तो अदालत परिसर में नए जजों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। वर्तमान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के कोर्टरूम को मिलाकर परिसर में कुल 60 कोर्टरूम हैं। इन 60 कोर्टरूम में से 4 फैमिली कोर्ट के पास हैं, जिससे शेष 56 कोर्टरूम सेशन जज और मजिस्ट्रेट के लिए बचते हैं। जगह की इसी कमी के चलते 10 कोर्टरूम को विधिक सेवा प्राधिकरण की उस इमारत में स्थानांतरित करना पड़ा है, जिसे मूल रूप से मध्यस्थता के लिए बनाया गया था। बुनियादी सुविधाओं का हाल यह है कि विधिक सेवा प्राधिकरण की बिल्डिंग में चल रहे ये 10 कोर्टरूम इतने छोटे हैं कि वहां गवाहों और आरोपियों के बयान दर्ज करने के लिए कठघरा (विटनेस बॉक्स) तक नहीं है। मुकदमों की फाइलें रखने वाली अलमारियां कोर्टरूम में न आ पाने के कारण बाहर लॉबी में रखी गई हैं, जिससे केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नई कोर्ट परियोजना में बाधा

सभी अदालतों, जजों के चेंबर और प्रशासनिक शाखाओं को एक ही छत के नीचे लाने के लिए हाई कोर्ट ने पुरानी जेल की जमीन पर एक मल्टी-स्टोरी जिला न्यायालय परिसर बनाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, इसी जमीन पर हाउसिंग बोर्ड ने भी आवासीय कॉलोनी बनाने का प्रस्ताव रख दिया। दोनों प्रस्ताव आने के बाद जेल विभाग ने जगह की कमी का हवाला देते हुए गांधीनगर की नई जेल से 31 कैदियों को वापस पुरानी जेल में शिफ्ट कर दिया। इस खींचतान के चलते नई कोर्ट बिल्डिंग का प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका है।