बुलंद सोच, दिल्ली।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को लेकर एक बड़ा दावा किया है। संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि सरकार ने एक बार फिर आश्वासन दिया है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार और असम के बाद राजस्थान में भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की गारंटी दी गई है।
दिल्ली पुलिस के साथ बैठक और आश्वासन
सौरभ दास ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि बिहार और असम की अधिसूचनाओं के बाद उन्हें यह भरोसा भी दिया गया है कि राजस्थान में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई से रोकने का आश्वासन मिला है। मंगलवार तड़के करीब दो बजे सौरभ दास ने सीजेपी की कानूनी समन्वयक रत्ना सिंह के साथ एक वीडियो साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों से बैठक हुई, जिन्होंने बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। दास ने कहा कि उन्होंने सरकार से किए गए वादों के पूरा न होने की आशंका जताई, जिसके बाद उन्हें दोबारा भरोसा दिलाया गया।
बिहार अधिसूचना और अन्य राज्यों से उम्मीद
सौरभ दास के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें बिहार सरकार की वह अधिसूचना भी उपलब्ध कराई, जिसमें 26 जुलाई से पहले प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की बात कही गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य राज्यों से भी इसी तरह की अधिसूचनाएं जारी होंगी।
सीजेपी का समर्थन और कानूनी सहायता पहल
सीजेपी ने पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने की अपील की है। सौरभ दास ने कहा कि संगठन उनके साथ है और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सौरभ दास ने यह भी बताया कि सीजेपी एक ऐसी वेबसाइट शुरू करने जा रही है, जहां विभिन्न जिलों के वकील अपना नाम, स्थान और उपलब्ध कानूनी सहायता का विवरण दर्ज कर सकेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस पहल के लिए एक करोड़ रुपये की कानूनी सहायता की घोषणा की है और देशभर के वकीलों से इसमें सहयोग करने की अपील की है।
आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी
सीजेपी ने स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया गया और भविष्य में नए मामले दर्ज किए गए, तो संगठन फिर से आंदोलन करने को मजबूर होगा। इससे पहले संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रांका भी इसी तरह की चेतावनी दे चुके हैं।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अभिजीत दिपके और सीजेपी के अन्य सदस्यों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा कुछ मांगें मानने के बाद 37 दिन से चल रहे आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की थी। यह आंदोलन नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर चलाया गया था।

