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2026-07-29

इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला: ईडी ने 20 हजार पेज की चार्जशीट दायर की, राशि बढ़कर 103.42 करोड़ हुई

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंदौर नगर निगम के फर्जी बिल घोटाले में पीएमएलए कोर्ट में 20 हजार पेज की चार्जशीट दायर की है। इसमें घोटाले की राशि 90 करोड़ रुपए से बढ़कर 103 करोड़ 42 लाख रुपए हो गई है।

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मामले में 32 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन परिवाद (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर किया गया है। इन आरोपियों में नगर निगम के अधिकारी, स्थानीय निधि लेखा एवं रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के कर्मचारी, ठेकेदार और अन्य निजी व्यक्ति शामिल हैं। सभी पर मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से सरकारी धन को ठिकाने लगाने, छुपाने और गबन करने के आरोप लगाए गए हैं।

ईडी की कार्रवाई और संपत्ति फ्रीज

ईडी ने अपने आरोप-पत्र में कोर्ट को बताया है कि 5 और 6 अगस्त 2024 को 20 ठिकानों पर मारे गए छापों में 22.04 करोड़ रुपए की संपत्तियों को फ्रीज किया गया था। इन संपत्तियों में नगद राशि, बैंक खाते, एफडी, डीमैट खाते और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, ईडी ने 52 अचल संपत्तियों को भी कुर्क किया है, जिनका मूल्य 37.14 करोड़ रुपए है। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश स्थित मकान, व्यावसायिक भवन, भूखंड और कृषि भूमि शामिल हैं।

अब तक मामले में कुल 59.18 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की जा चुकी हैं। ईडी ने इन संपत्तियों को राजसात करने की मांग की है।

विशेष पीएमएलए कोर्ट ने सभी आरोपियों को समन जारी कर मामले की सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी है।

घोटाले का तरीका

ईडी ने यह जांच एमजी रोड थाने में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि जिन कार्यों के नाम पर भुगतान हुआ, वे या तो हुए ही नहीं थे या पहले ही पूरे हो चुके थे।

ईडी ने चार्जशीट में बताया है कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड पूर्व सहायक यंत्री अभय सिंह राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा थे। कई आरोपी ठेकेदार कंपनियों ने निगम अधिकारियों के साथ सांठगांठ करते हुए फर्जी वर्क ऑर्डर फाइल और बिल बनाए।

इन फर्जी गतिविधियों के माध्यम से 103 करोड़ 42 लाख रुपए की राशि को अपने खातों में प्राप्त किया गया और आपस में बांटा गया। साथ ही, बिजनेस ट्रांजैक्शन की आड़ में यह राशि अन्य कंपनियों और संस्थाओं को भी दी गई, जिसकी मदद से कई चल-अचल संपत्तियां अर्जित की गईं और निजी खर्च में इसका उपयोग किया गया।