बुलंद सोच, दतिया।
दतिया विधानसभा उपचुनाव का प्रचार अब सभाओं से निकलकर खेतों तक पहुंच गया है। रविवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने जनसंपर्क के दौरान भाषण देने के बजाय सीधे किसान के खेत में पहुंचकर धान की रोपाई की तैयारी में हाथ बंटाया।
यह घटना दतिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सोनार की है। जीतू पटवारी अपने जनसंपर्क अभियान के तहत गांव-गांव जा रहे थे, तभी उन्होंने मुख्य मार्ग के किनारे किसान कालीचरण पटेल के खेत में हलचल देखी। खेत में कालीचरण पटेल का बेटा जयदीप पटेल ट्रैक्टर से जुताई और धान रोपाई की तैयारी कर रहा था।
पटवारी ने अपनी गाड़ी रोककर पैदल खेत तक पहुंचकर किसानों का हालचाल पूछा। इसके बाद वे खुद ट्रैक्टर की सीट पर बैठे और कुछ मिनट तक ट्रैक्टर चलाकर खेत में फेरे लगाए। इस दौरान उन्होंने किसानों से खेती-किसानी और उनकी समस्याओं पर भी चर्चा की।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
किसान कालीचरण पटेल ने कहा कि चुनाव में नेता आते हैं, लेकिन खेत तक आकर मिट्टी से जुड़ने वाला नेता उन्होंने पहली बार देखा है।
जयदीप पटेल ने बताया कि रोपाई का समय है और पटवारी ने स्वयं खाद-बीज की उपलब्धता तथा अन्य समस्याओं के बारे में पूछा। ट्रैक्टर से उतरने के बाद जीतू पटवारी ने ग्रामीणों से कहा कि चुनाव केवल वोट का अवसर नहीं, बल्कि किसान की जिंदगी को समझने का भी अवसर है।
उन्होंने यह भी कहा कि धान की रोपाई के समय किसान की मेहनत सबसे अधिक होती है और कर्ज, खाद, बिजली तथा पानी की समस्या हर खेत में दिखती है। पटवारी ने बताया कि कांग्रेस सरकार में किसानों का कर्ज माफ किया गया था और आगे भी किसानों की आवाज सबसे पहले उठाई जाएगी।
ट्रैक्टर चलाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वे गांव में पले-बढ़े हैं और मिट्टी से कभी दूर नहीं हुए। खेत में आने पर उन्हें पुराने दिन याद आ गए।
जीतू पटवारी का ट्रैक्टर चलाते हुए वीडियो सामने आने के बाद सियासी चर्चा तेज हो गई। कांग्रेस इसे जनता से जुड़ाव बता रही है और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी शुरू से किसान-केंद्रित राजनीति करती आई है। खेत में उतरकर काम करना उसी परंपरा का हिस्सा है।
वहीं, भाजपा इसे चुनावी स्टंट करार दे रही है।
दतिया उपचुनाव में इस बार नेता पारंपरिक रैलियों के बजाय सीधे लोगों के बीच पहुंच रहे हैं, जहां कोई चौपाल लगा रहा है तो कोई घर-घर जाकर संपर्क कर रहा है।
