बुलंद सोच।

दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा अब संसद तक पहुंच गया है। राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेता इस विषय पर सरकार को घेर रहे हैं। दूसरी ओर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने पैलेट गन चलाने के मामले में जांच शुरू कर दी है।
गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा। इस बार पैलेट गन की बनावट, इसे चलाने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और प्रशिक्षण में बदलाव किए जाने की संभावना है।
यह संभावना इसलिए है क्योंकि पैलेट गन से दागे गए शैल से निकलने वाले छर्रे ऊपर की तरफ बड़े घेरे में फैल रहे हैं।
जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने किन परिस्थितियों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। वीडियो फुटेज की जांच की जा रही है और मौके पर मौजूद आरएएफ टीम प्रभारी तथा सहयोगी कर्मियों से पूछताछ की जाएगी।
यह भी देखा जाएगा कि पैलेट गन चलाते समय भीड़ कितनी थी और क्या उसे तितर-बितर करने के अन्य सभी विकल्प समाप्त हो गए थे।
आरएएफ के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, पैलेट गन के इस्तेमाल से पहले लाठीचार्ज, वाटर कैनन और इलेक्ट्रिक शॉट उपकरण जैसे कई विकल्प अपनाए जाते हैं। इन विकल्पों का उद्देश्य प्रदर्शनकारी को किसी भी प्रकार की शारीरिक हानि से बचाना होता है।
पिछले एक दशक में यह बात सामने आई है कि पैलेट गन के छर्रे सामने वाले व्यक्ति के ऊपरी हिस्से में एक बड़ा घेरा बना रहे हैं, जिससे चेहरे, आंख और सिर पर अंधाधुंध छर्रे लगे। पैलेट गन चलाने के प्रशिक्षण में यह सिखाया जाता है कि इससे शरीर के निचले हिस्से, विशेषकर घुटनों की तरफ, निशाना साधना चाहिए।

