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2026-07-24

डकैती में घायल द्रविता सिंह को आठ साल बाद 4.20 लाख रुपये मुआवजा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, मुंबई।

मुंबई की रहने वाली द्रविता सिंह को आठ साल पहले हुए एक दर्दनाक हादसे में अपनी चार उंगलियां और शरीर के अन्य अंग गंवाने के बाद अब रेलवे दावा अधिकरण से राहत मिली है। अधिकरण ने सेंट्रल रेलवे को द्रविता को 4.20 लाख रुपये का मुआवजा और उस पर ब्याज देने का निर्देश दिया है। यह निर्णय आठ साल के लंबे इंतजार के बाद आया है, हालांकि सत्र न्यायालय में आपराधिक मामले की सुनवाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

दर्दनाक हादसा

यह पूरी घटना 7 फरवरी 2018 की है, जब 23 वर्षीय द्रविता सिंह सैंडहर्स्ट रोड और मस्जिद रेलवे स्टेशन के बीच चलती लोकल ट्रेन में सफर कर रही थीं। उसी दौरान पटरियों के पास छिपे एक लुटेरे ने उन पर लाठी से हमला कर दिया। इस हमले की वजह से वे संतुलन खोकर ट्रेन से नीचे गिर गईं। दुर्भाग्य से वे सामने से आ रही दूसरी ट्रेन की चपेट में आ गईं, जिससे उनके बाएं हाथ की तीन उंगलियां, पैर का अंगूठा और दाहिने पैर का कुछ हिस्सा बुरी तरह कुचल गया। इसके बाद उन्हें कई सर्जरीज और स्किन ग्राफ्टिंग की तकलीफदेह प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा, तब जाकर वे फिर से अपने पैरों पर चलने के लायक हो सकीं।

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कानूनी लड़ाई और रेलवे का विरोध

हादसे के बाद द्रविता ने अपने वकील के माध्यम से जुलाई 2018 में रेलवे दावा अधिकरण में मुआवजे के लिए अर्जी दी थी। उन्होंने अदालत में एक हलफनामा देकर पूरी घटना और अपनी गंभीर चोटों के बारे में बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास एक वैध रिटर्न टिकट था और वे पूरी तरह नियम मानकर सफर कर रही यात्री थीं। दूसरी तरफ, रेलवे के वकील ने अधिकारियों की एक जांच रिपोर्ट पेश करते हुए इस दावे का विरोध किया। रेलवे का कहना था कि यह हादसा द्रविता की अपनी लापरवाही की वजह से हुआ, क्योंकि वे ट्रेन के दरवाजे पर खड़ी होकर फोन पर बात कर रही थीं। रेलवे ने यह तर्क भी दिया कि पुलिस को उनके पास से कोई टिकट नहीं मिला था और वे पटरियों पर दौड़ते समय सामने से आती ट्रेन की चपेट में आईं, जो कि कानूनी रूप से एक अपराध है।

अधिकरण का निर्णय

हालांकि, अधिकरण ने रेलवे के तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई यात्री ट्रेन से गिर जाता है और अपना चुराया गया मोबाइल वापस पाने के चक्कर में चोर के पीछे भागता है, तो इस दौरान लगी चोटों को पटरियों पर अवैध रूप से जाना नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इसे रेलवे कानून के तहत एक अप्रिय घटना माना और द्रविता के दिए गए बयान के आधार पर उन्हें पूरी तरह से एक वैध यात्री स्वीकार किया। कोर्ट ने अपने फैसले में द्रविता को 4.20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, साथ ही घटना के दिन से लेकर फैसले के दिन तक का 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने को भी कहा। इस पूरी रकम में से द्रविता को उनके बैंक खाते के जरिए 40,000 रुपये निकालने की छूट दी गई है, जबकि बाकी बची रकम को किसी सरकारी बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट योजना में जमा रखने का निर्देश दिया गया है।

द्रविता का अदम्य साहस

इतने बड़े और दर्दनाक हादसे के बावजूद द्रविता ने हिम्मत नहीं हारी। हादसे के महज एक साल के भीतर ही वे पैरों में पट्टियां बांधकर मुंबई मैराथन में दौड़ने उतरीं और अपनी अधूरी पढ़ाई भी पूरी की। आज वे एक कंपनी में नौकरी करने के साथ-साथ अपनी आगे की पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं।

आपराधिक मामले की स्थिति

इस मामले में पकड़े गए तीन आरोपियों में से एक नाबालिग था, जबकि एक आरोपी को जमानत मिल चुकी है। 7 फरवरी 2018 को हुई इस घटना के बाद पुलिस ने हमला करने वाले नाबालिग आरोपी, चोरी का मोबाइल बेचने में मदद करने वाले अजय पाल और मोबाइल खरीदने वाली रुख नाम की महिला के खिलाफ जानलेवा हमले और डकैती का केस दर्ज किया था, जिसकी अदालती सुनवाई का अभी भी इंतजार है।