बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर पुलिस का लक्ष्य अंतरराज्यीय गांजा तस्कर सुभाष चंद्र पांगी था, जो ओडिशा के पांडवा, खड़गपुर का निवासी था। वह ग्वालियर के रास्ते जाने वाले गांजे और डोडा-चूरा का सबसे बड़ा सप्लायर था, और उसका ठिकाना आंध्र प्रदेश के घने जंगल में, ओडिशा और आंध्र प्रदेश राज्य की सीमा से सटा एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र था। पुलिस ने पहले छोटे एजेंटों को पकड़ा था, लेकिन नशे के इस काले कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए पांगी की घेराबंदी हेतु एक विशेष टीम बनाई गई।
ग्वालियर के एक दारोगा और आधा दर्जन पुलिसकर्मी मैले कपड़ों में चरवाहा और मजदूर बनकर सात दिन तक इस नक्सल प्रभावित जंगल में घूमते रहे। सात दिन तक जंगल में रुकने के बाद ग्वालियर पुलिस इस तस्कर को पकड़ने में सफल रही।
यह विशेष ऑपरेशन डीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार के नेतृत्व में चला, जिन्होंने एसआई बृजेश भार्गव और पांच पुलिसकर्मियों को मौके पर रवाना किया। ऑपरेशन से पहले ही होमवर्क पूरा हो चुका था, और बिचौलिए से उसका एक नंबर मिल गया था। साइबर विशेषज्ञ राजकुमार परमार ने इस नंबर के जरिए उसकी लोकेशन और अन्य जानकारी की पूरी पड़ताल की थी, जिससे उसकी सटीक लोकेशन मिली।
इस ऑपरेशन में पहली बार ऐसा हुआ, जब ग्वालियर से रवाना हुई टीम ने सामान्य बातचीत के लिए तेलुगु भाषा के कुछ जरूरी और आम बोलचाल वाले शब्द सीखे। इसका कारण यह था कि जहां यह तस्कर छिपा था, वहां कोई हिंदी नहीं समझता था। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में टीम ने अपने हथियार लुंगी के नीचे एक शॉर्ट पहनकर उसमें विशेष जेब बनवाकर छिपाए थे।
सुभाष की निगरानी के लिए उसके गांव पांडवा तक पहुंचना जरूरी था, लेकिन वह वहां बहुत कम आता था। सुभाष की पहचान होने के बाद टीम ने उसे जंगल से ही पकड़ लिया, जिसमें स्थानीय पुलिस का एक सिपाही भी उनके साथ था। गिरफ्तारी के बाद टीम लगभग 125 किलोमीटर तक बिना गाड़ी रुके जंगल से बाहर आकर उस स्थान पर रुकी, जहां पास में एक थाना था।
उत्तर भारत में नेटवर्क ध्वस्त और सजा
सुभाष चंद्र पांगी के पकड़े जाने से उत्तर भारत में गांजे का एक बड़ा नेटवर्क टूट गया। उसके गुर्गे 2023 में तब पकड़े गए थे, जब ट्रक से 400 किलो गांजा जब्त किया गया था। उसके पकड़े जाने के बाद ग्वालियर, आगरा, दिल्ली-एनसीआर, धौलपुर और राजस्थान तक गांजा सप्लाई का नेटवर्क ध्वस्त हो गया।
यह एक बड़ा सप्लायर था, जिसे आजीवन कारावास की सजा भी हो गई है।
अन्य मामले और नशे का बढ़ता खतरा
फरवरी 2023 में रतलाम के भाजपा नेता विवेक पोरवाल को भी ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गांजा तस्करी के मामले में पकड़ा था। इस टीम का नेतृत्व एसआई शैलेंद्र गुर्जर कर रहे थे, और टीम सिविल ड्रेस में थी। विवेक पोरवाल पर भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी की जिम्मेदारी थी। पुलिस टीम पर हमला भी हुआ था, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी।
डीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार ने नईदुनिया को बताया कि नशा तस्करों का मुख्य टारगेट अब स्कूल और कॉलेज के छात्र हैं। पकड़े गए सभी नशा तस्करों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से ग्वालियर के रास्ते दिल्ली-एनसीआर तक नशा जा रहा है, जहां देशभर के छात्र पढ़ाई करने जाते हैं।
अब गांजे की सामान्य किस्म से ज्यादा ‘ओजी गांजे’ की डिमांड है, जिसका नाम ‘ओरिजिनल गैंगस्टर’ है। यह हाइड्रोपोनिक तकनीक से समुद्र के पानी में उगाया जाता है। यह काफी महंगा है और इसका नशा अधिक तीव्र होता है। इसकी छोटी सी पुड़िया ही 10 लोगों के नशा करने के लिए पर्याप्त होती है।

