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2026-08-14

इंदौर दंपती हत्याकांड: आरोपी धनंजय को दोहरा आजीवन कारावास

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर की जिला कोर्ट ने हाल ही में करीब छह वर्ष पुराने दंपती अमित-सीमा (परिवर्तित नाम) हत्याकांड में मुख्य आरोपी धनंजय उर्फ शुभांशु यादव (25) को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने गुरुवार को यह बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को हत्या के दो अलग-अलग मामलों में दो-दो आजीवन कारावास के अलावा अन्य धाराओं में भी कठोर कारावास और कुल 33 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। कोर्ट ने अर्थदंड से प्राप्त राशि में से 20 हजार रुपए मृतक दंपती के बेटे को मानसिक क्षति के प्रतिकर के रूप में देने का आदेश भी दिया है।

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साजिश का खुलासा

पुलिस की विवेचना में सामने आया कि धनंजय और परिवार की बेटी के बीच प्रेम संबंध थे। परिवार की ओर से इन संबंधों को रोकने का प्रयास किया जा रहा था। इसी विरोध को रास्ते से हटाने के लिए धनंजय और बेटी ने मिलकर दंपती की हत्या की साजिश रची थी।

घटनाक्रम

दिसंबर 2020 की रात इंदौर के पश्चिम क्षेत्र स्थित घर में दंपती अमित और सीमा (परिवर्तित नाम) सो रहे थे। आरोपी धनंजय ने 17 दिसंबर 2020 की रात करीब 2 बजे से सुबह 7 बजे के बीच तड़के घर में प्रवेश किया। उसने धारदार सतूर और हसिए जैसे हथियारों से दोनों पर कई वार किए। घटना के बाद घर को बाहर से बंद कर दिया गया था। सुबह परिवार के बेटे ने माता-पिता को खून से लथपथ देखकर पुलिस को सूचना दी।

गुमराह करने की कोशिश

घटनास्थल से एक नोट मिला था, जिसे शुरुआत में घटना से जुड़ा महत्वपूर्ण सुराग माना गया। यह नोट बेटी के नाम से छोड़ा गया था। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि नोट में लिखी कहानी वास्तविक घटना नहीं थी, बल्कि जांच को दूसरी दिशा में ले जाने और सहानुभूति हासिल करने के लिए तैयार की गई थी। पुलिस ने बाद में नोट, उसकी लिखावट और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्य भी जब्त किए।

साक्ष्य और गिरफ्तारी

धनंजय की गिरफ्तारी 18 दिसंबर 2020 को सुबह की गई। पूछताछ में उसने घटना में इस्तेमाल हथियार और घटना के समय पहने कपड़ों को छिपाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस उसे गवाहों के साथ सुपर कॉरिडोर के पास खाली मैदान, सर्विस रोड और झाड़ियों वाले क्षेत्र में ले गई। वहां से खून के धब्बों वाला धारदार हथियार, घटना के समय पहनी गई जींस, टी-शर्ट और जूते बरामद किए गए। इन हथियारों और कपड़ों को सील कर एफएसएल जांच के लिए भेजा गया।

कोर्ट का फैसला

पुलिस की पूरी कहानी महज स्वीकारोक्ति के आधार पर नहीं टिकी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले रक्त और अन्य भौतिक साक्ष्य, बरामद हथियार और कपड़े, डीएनए रिपोर्ट, च्युइंगम से मिले डीएनए, हथियार पर मिले बाल, गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी से जुड़ी कड़ियां तथा पुलिस गवाहों की गवाही ने अभियोजन के मामले को मजबूत किया। इसी साक्ष्य की कड़ी के आधार पर जिला कोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को धनंजय को दोषी ठहराते हुए दो मामलों में आजीवन कारावास सुनाया।