BREAKING NEWS
2026-08-14

इंदौर में हाई कैफीन पेय एनर्जी ड्रिंक बताकर धड़ल्ले से बिक रहे, बच्चों-किशोरों को लत

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में मीठे पानी में कैफीन की अत्यधिक मात्रा मिलाकर एनर्जी ड्रिंक के नाम पर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। किशोर और बच्चे इस लत को लगाने वाले कैफीन बेवरेज के आदी हो रहे हैं। कम कीमत में मोहल्ले की आम दुकानों तक पहुंची छोटी बोतलें इसका कारण बन रही हैं। 150 मिलीलीटर की बोतल में 45 मिलीग्राम कैफीन और 200 मिलीलीटर की कैन में 60 मिलीग्राम तक कैफीन मिलाया जा रहा है। कैफीन और शकर की मात्रा पीने वाले को अच्छा महसूस कराती है और फिर इसे पीने की तलब लगती है, जो बाद में लत में बदल जाती है।

Advertisement

राज्यों की कार्रवाई और मध्य प्रदेश की स्थिति

राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने इस खतरे को भांप लिया है और सख्ती शुरू कर दी है। राजस्थान में एनर्जी ड्रिंक के नाम से बिक रहे ऐसे पेय की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। महाराष्ट्र में स्कूलों के आसपास की दुकानों पर इनकी बिक्री पर पाबंदी लगाई गई है। हालांकि, मध्य प्रदेश अब तक बेपरवाह बना हुआ है। प्रदेश के अधिकारी केंद्रीय निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं ताकि कार्रवाई की जा सके। इंदौर में बीते दिनों इस तरह के बेवरेज के सैंपल लेने की कार्रवाई जरूर की गई। खाद्य और एफएसएसएआई से जुड़े स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे ड्रिंक पर नई गाइडलाइन के इंतजार में मध्य प्रदेश में कार्रवाई रुकी है और कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यहां बिक रही सभी बोतलों पर निर्देश लिखे गए हैं कि इन पेय का सेवन बच्चे, गर्भवती महिलाएं और दूध पिला रही माताएं न करें।

बाजार की स्थिति और बिक्री के आंकड़े

पांच बड़ी कंपनियां प्रमुख तौर पर एनर्जी ड्रिंक के नाम पर लत लगाने वाला हाई कैफीन ड्रिंक बेचती रही थीं। एक से डेढ़ साल में छोटी कंपनियां भी ऐसे उत्पादों के साथ बाजार में उतर गई हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने पहले ऐसे पेय की कीमत 100-150 रुपये और उससे अधिक निर्धारित की थी। बीते वर्षों में 10 रुपये की कीमत में 150 मिलीलीटर की बोतल और 30 रुपये में एलुमिनियम कैन बाजार में उतार दी गई हैं। कम कीमत के कारण तेजी से बच्चे और किशोर इसके ग्राहक बन रहे हैं। कैफीन ड्रिंक बेच रही एक नामी कंपनी के रीजनल मैनेजर सन्नी तोमर के अनुसार, एनर्जी ड्रिंक या हाई कैफीन बेवरेज इस उद्योग का सबसे उभरता पोर्टफोलियो है। देश में बीते साल तीन बिलियन बोतलें बिकी थीं। उद्योग का अनुमान है कि हर साल इस बेवरेज का बाजार 100 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। 2028 तक भारत में इसका बाजार 1.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। कम कीमत में लांच हो रहे नए उत्पाद इसकी वजह बने हैं। मालवा-निमाड़ में हर माह करीब 10 करोड़ रुपये का बेवरेज बेचा जा रहा है।

स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने एनर्जी ड्रिंक को लेकर एडवाइजरी जारी की है, जिसके अनुसार बच्चों और किशोरों को इस तरह के पेय बिल्कुल नहीं दिए जाने चाहिए। हाई कैफीन ड्रिंक पीने से बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पहुंचता है। इससे हृदय की धड़कनें असामान्य होती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ता है, नींद में कमी की समस्या और एंग्जायटी होती है। बच्चों के दिमाग पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। दांत खराब होने, बेचैनी महसूस होना, पेट में दर्द और गैस की समस्या और मोटापा बढ़ने जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं। ऐसे ड्रिंक में शकर की मात्रा अधिक होने से बच्चा डायबिटिक भी हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय और विभाग की कार्रवाई

चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के पूर्व अधीक्षक डॉ. हेमंत जैन के अनुसार, शकर, सोडे और कैफीन वाले किसी पेय को एनर्जी ड्रिंक नहीं कहा जा सकता। एनर्जी तो प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और पोषक तत्वों से मिलती है। कैफीन और शकर दोनों ही दिमाग को उत्तेजित करते हैं और बार-बार इसकी मांग करते हैं, ऐसे में इस तरह के पेय लत लगाने वाले होते हैं। उनका कहना है कि बच्चों-किशोरों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव होता है और ऐसे पेय पर पूरी तरह प्रतिबंध लगना चाहिए। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मनीष स्वामी ने बताया कि केंद्र से निर्देश मिले थे, जिसके बाद इंदौर में इस तरह के तमाम एनर्जी ड्रिंक के सैंपल लेकर उसकी तय लैब में जांच करवाई गई। रिपोर्ट एफएसएसएआई मुख्यालय भेजी गई है। अभी किसी तरह की कार्रवाई के कोई निर्देश नहीं हैं और आगे जो भी निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्रवाई होगी।