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2026-08-14

मध्य प्रदेश में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई जिलों में जलभराव; भोपाल-आगर-मालवा में स्कूल बंद

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। पिछले दो दिनों से सक्रिय मजबूत मौसम तंत्र के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल में बीते 24 घंटे में लगभग 7 इंच बारिश हुई, जिससे निचले इलाकों और कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। कई स्थानों पर सड़कें और रास्ते पानी में डूब गए, वहीं नदियों और नालों में उफान आने से आवागमन बाधित हुआ। बारिश का सर्वाधिक प्रभाव भोपाल, सीहोर, शाजापुर, विदिशा, मंडला और राजगढ़ जिलों में देखा गया है। राजगढ़ के ब्यावरा स्थित रेलवे अंडरपास में पानी भरने से लगभग 25 गांवों का संपर्क टूट गया। विदिशा जिले में बाढ़ के पानी में फंसे 17 लोगों को बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला। लगातार बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए भोपाल और आगर-मालवा जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने नागरिकों से नदी, नाले और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने की अपील की है।

मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम केंद्र ने मंगलवार को नीमच, मंदसौर, रतलाम, आलीराजपुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अतिरिक्त, भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

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जलाशयों में बढ़ा जलस्तर

भारी बारिश का असर जलाशयों पर भी पड़ा है। जोहिला बांध के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है। भोपाल के कलियासोत और केरवा बांधों के साथ-साथ सीहोर के कोलार बांध में भी जलस्तर तेजी से बढ़ा है। भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर भी लगभग तीन फीट बढ़ गया है।

मौसम तंत्र और बारिश के आंकड़े

मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 10 अगस्त के आसपास उत्तर मध्य प्रदेश और उसके आसपास एक कम दबाव का क्षेत्र बना था। इसके साथ ही लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला एक चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय रहा। मानसून की द्रोणिका भी इसी तंत्र से होकर गुजर रही थी, जिसके कारण प्रदेश के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश हुई। अब उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में एक नया चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हुआ है। इसके प्रभाव से लगभग 12 अगस्त के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। ऐसे में आगामी चार दिन मध्य प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 19 इंच यानी 483 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि में लगभग 22.5 इंच यानी 571.4 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश अभी भी सामान्य बारिश से लगभग 15 प्रतिशत पीछे है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी लगभग 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 13 प्रतिशत है। प्रदेश के 46 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की कमी अधिक बनी हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया सहित कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। पश्चिमी हिस्से के भी कई जिले बारिश के मामले में पिछड़े हुए हैं। हालांकि, भोपाल, गुना, सीहोर, ग्वालियर, अनूपपुर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इस बार मानसून की शुरुआत कमजोर रही थी, जून में प्रदेश में सामान्य से लगभग 14 प्रतिशत कम बारिश हुई। जुलाई में कई बार मानसून के सक्रिय और कमजोर होने का दौर चला। जुलाई के अंतिम सप्ताह में एक मजबूत सिस्टम सक्रिय होने के बाद बारिश ने रफ्तार पकड़ी और महीने का बारिश कोटा पूरा हो गया। इसके बावजूद जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। अब अगस्त में सक्रिय होने वाला नया सिस्टम प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में सुधार ला सकता है। मध्य प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश लगभग 37.3 इंच मानी जाती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के आसपास रहती है।