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2026-07-29

इंदौर में सभी जल स्रोतों का बनेगा हेल्थ कार्ड, भागीरथपुरा त्रासदी के बाद प्रशासन की नई कार्ययोजना

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में भागीरथपुरा त्रासदी के बाद सरकार ने जल सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुए हादसे में 35 लोगों की जान चली गई थी, जिसे विस्तृत जांच के बाद प्रशासन और सरकार ने दूषित पानी से फैलने वाली महामारी का गंभीर संकेत माना है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के कड़े निर्देशों के पालन में, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हाल ही में राज्य के सभी 55 जिलों के पर्यावरण प्लान को संशोधित किया है।

इंदौर में विशेष कार्ययोजना

इसी योजना के तहत, इंदौर जिले में पानी की गुणवत्ता की लगातार जांच के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया है। इसके अतिरिक्त, जिले के सभी जल स्रोतों का विस्तृत हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा और उनकी सटीक स्थिति दर्ज करने हेतु जियो टैगिंग की जाएगी। पानी को हर तरह के प्रदूषण से सुरक्षित रखने तथा प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए नौ प्रमुख बिंदुओं पर आधारित एक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस नई योजना में सतही पानी, भूजल और पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं तथा बावड़ी के संरक्षण के साथ-साथ दूषित पानी के सही उपचार पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इंदौर में स्थापित वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल जिले की नदियों, तालाबों और अन्य सभी जल स्रोतों की नियमित निगरानी करेगी। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार, यह नई योजना पूरे जिले में स्वच्छ जल आपूर्ति और जल संरक्षण के लिए तैयार की गई है।

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जांच रिपोर्ट और शासन का निर्देश

भागीरथपुरा में हुए जल जनित हादसे को लेकर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट को इंदौर के नए एनवायरनमेंट प्लान में आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि भागीरथपुरा की घटना पूरी तरह से एक जल जनित आउटब्रेक थी। लैब जांच के दौरान पानी के नमूनों में खतरनाक ई कोलाई बैक्टीरिया और अन्य दूषित तत्व पाए गए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर, शासन ने सभी जिलों से उनके क्षेत्र के जल स्रोतों में सीवरेज का गंदा पानी मिलने से रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है।

क्रियान्वयन और निगरानी

प्रशासन द्वारा जिले में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए जा रहे हैं। सर्वप्रथम, जिले की सभी नदियों, तालाबों और उनके लगातार प्रदूषित हो रहे संवेदनशील हिस्सों को चिह्नित किया जाएगा। इसके उपरांत, तय मानकों और गुणवत्ता के आधार पर सभी जल स्रोतों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा। यह कार्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नगर निगम की अन्य संबंधित एजेंसियां मिलकर पूरा करेंगी। शहर में दूषित पानी के हॉट स्पॉट का चयन किया जाएगा। वर्तमान में कान्ह और सरस्वती नदी के किनारे ऐसे कई हॉट स्पॉट मौजूद हैं, जहाँ गंदा पानी मिल रहा है। हालांकि नदी के पानी की ऑनलाइन निगरानी पहले से की जा रही है, लेकिन अब इन चिह्नित स्थानों पर सुधार कार्य तेजी से किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, नदी और तालाबों को कचरा फेंकने तथा अवैध अतिक्रमण से पूरी तरह बचाया जाएगा। भूजल स्रोतों की अनिवार्य रूप से जियो टैगिंग की जाएगी और जिले में वॉटर हार्वेस्टिंग व वॉटर रिचार्जिंग की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। आम जनता के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ईवीएन अलर्ट ऐप और ऑनलाइन सिस्टम चालू किया गया है, जिससे दूषित पानी से जुड़ी किसी भी शिकायत का तुरंत निवारण किया जा सके।