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2026-08-03

इंदौर जनकल्याण शिविरों में राजस्व सेवाओं के लिए 1.11 लाख से अधिक आवेदन

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

सरकार जनकल्याण शिविरों को आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का माध्यम बताती है। हालांकि, इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों का विश्लेषण प्रशासनिक व्यवस्था की एक भिन्न तस्वीर प्रस्तुत करता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शिविरों में राजस्व विभाग की सेवाओं की सर्वाधिक मांग रही। खसरा-खतौनी की प्रतिलिपि, चालू नक्शा, नामांतरण और सीमांकन जैसे कार्यों के लिए 1.11 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।

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यह संख्या किसी भी अन्य सेवा की तुलना में काफी अधिक है। आंकड़ों के विस्तृत विवरण के अनुसार, खसरा-खतौनी की प्रति के लिए 56,917 आवेदन, चालू नक्शे के लिए 48,172 आवेदन, अविवादित नामांतरण के लिए 3,349 आवेदन और सीमांकन के लिए 2,848 आवेदन दर्ज किए गए।

राजस्व सेवाओं के बाद विभिन्न प्रमाणपत्रों की भी बड़ी मांग दर्ज की गई। स्थानीय निवासी प्रमाणपत्र के लिए 8,451 आवेदन, आय प्रमाणपत्र के लिए 6,679 आवेदन, अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाणपत्र के लिए 1,675 आवेदन तथा अनुसूचित जाति-जनजाति के जाति प्रमाणपत्र के लिए 1,314 आवेदन प्राप्त हुए। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाओं, प्रवेश प्रक्रियाओं और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रमाणपत्रों की आवश्यकता लगातार बनी हुई है।

एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया कि जिन योजनाओं का सरकार सर्वाधिक प्रचार करती है, उनके लिए आवेदन अपेक्षाकृत कम संख्या में रहे। आयुष्मान भारत योजना के लिए 840 आवेदन, समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 575 आवेदन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 558 आवेदन और लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 315 आवेदन दर्ज किए गए।

जनकल्याण शिविरों के आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि प्रदेश में आम नागरिकों की पहली प्राथमिकता अभी भी जमीन के रिकॉर्ड, नामांतरण, सीमांकन और आवश्यक प्रमाणपत्र हैं। यह स्थिति इस बात का भी संकेत देती है कि राजस्व और प्रमाणपत्र संबंधी सेवाओं की नियमित व्यवस्था में कुछ बाधाएं हो सकती हैं, जिसके कारण नागरिकों को विशेष शिविरों का सहारा लेना पड़ रहा है। यदि ये सेवाएं समयबद्ध और सहज रूप से उपलब्ध हों, तो ऐसे शिविरों में इन सेवाओं के लिए इतनी बड़ी संख्या में आवेदन आने की आवश्यकता संभवतः नहीं पड़ेगी।