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2026-08-01

इंदौर में बारिश-नमी से बढ़े किडनी संक्रमण के मामले, अस्पतालों में मरीजों की भीड़

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में बारिश और नमी के कारण बैक्टीरिया तथा वायरस संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं। शासकीय सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 50 मरीज किडनी संक्रमण और उससे संबंधित समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के अन्य अस्पतालों में भी दूषित पानी, दस्त और डिहाइड्रेशन के कारण किडनी संक्रमण के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित जल के सेवन से शरीर में संक्रमण, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन हो रहा है, जिससे शहर के जलस्रोतों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के कई हिस्सों में अभी भी लगातार गंदा पानी आ रहा है, जिसके कारण लोग पानी उबालकर या उसमें दवाइयां डालकर पीने के लिए उपयोग कर रहे हैं।

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स्कीम नंबर 54 के निवासी अरविंदर सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र में नलों में प्रतिदिन गंदा पानी आ रहा है। उन्होंने नगर निगम के ऐप 311 और सीएम हेल्पलाइन पर भी कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ है। अरविंदर सिंह के अनुसार, बारिश में बीमारियों का खतरा पहले ही बढ़ जाता है और इस समय नगर निगम की यह लापरवाही जनता पर भारी पड़ सकती है।

सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. पद्मिनी ने बताया कि इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 40 से 50 मरीज किडनी संक्रमण और उससे जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज पहले यूरिन इन्फेक्शन, उल्टी या दस्त से पीड़ित थे। समय पर सही इलाज न मिलने और बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मनमर्जी से दवाइयां लेने के कारण लोग खुद ही किडनी की गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं, जिससे साधारण इन्फेक्शन गंभीर होकर किडनी तक पहुंच जाता है।

चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन से होने वाले संक्रमण का सीधा तथा घातक असर किडनी पर पड़ता है। लगातार दस्त और उल्टी होने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की भारी कमी हो जाती है, जिससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे मरीज जो पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, उनके लिए यह खतरा 2 से 3 गुना तक बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पेशाब में जलन, कम पेशाब आना, तेज बुखार, कमर में दर्द, शरीर में अत्यधिक कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती दौर में ही सही इलाज मिलने से इस संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। लोगों को बाहर के खान-पान से पूरी तरह परहेज करना चाहिए और बच्चों, बुजुर्गों तथा खुद को भी बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिए।

डॉ. पद्मिनी ने सलाह दी है कि केवल स्वच्छ, उबला हुआ या फिल्टर किया गया पानी ही पीना चाहिए। खुले, बासी और कटे हुए खाद्य पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। बिना डॉक्टर की लिखित सलाह के किसी भी मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवाएं न लें। दस्त या उल्टी की शिकायत होने पर तुरंत ओआरएस का घोल और पर्याप्त मात्रा में पानी लें। पेशाब में जलन, तेज बुखार या कमर में दर्द महसूस होने पर बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराएं।