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2026-08-02

इंदौर में 15 करोड़ के लोन के झांसे में सड़क ठेकेदार से 1.45 करोड़ की ठगी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर में एक सड़क ठेकेदार को व्यापार बढ़ाने के लिए 15 करोड़ रुपये का कमर्शियल लोन लेने की कोशिश महंगी पड़ी। साइबर ठगों ने खुद को प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर कारोबारी से 1.45 करोड़ रुपये विभिन्न मदों में वसूल लिए। रकम मिलने के बाद न तो लोन मिला और न ही पैसे वापस लौटाए गए। अब पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है। एडिशनल डीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के अनुसार, पीड़ित पीयूष गुर्जर सड़क निर्माण व्यवसाय से जुड़े हैं और कारोबार के लिए 15 करोड़ रुपये का लोन चाहते थे। इसके लिए पीयूष ने गूगल पर लोन उपलब्ध कराने वाली कंपनियों की तलाश की थी।

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ठगी का तरीका

सर्च के दौरान पीयूष का संपर्क खुद को डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (डीएसए) बताने वाले लोगों से हुआ। आरोपितों ने ‘पेंसी फिनवेस्ट’ और ‘कोर्सा फाइनेंस’ जैसी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर उनका भरोसा जीता और 1.87 करोड़ रुपये तक का लोन मंजूर कराने का दावा किया। विश्वास दिलाने के लिए पीड़ित को चेन्नई स्थित कार्यालय में बुलाकर बैठक भी कराई गई। इसके बाद, आरोपियों ने छह माह के अग्रिम ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, सर्विस चार्ज, सिक्योरिटी डिपॉजिट और निरीक्षण शुल्क समेत विभिन्न मदों के नाम पर किस्तों में 1.45 करोड़ रुपये चेन्नई और हैदराबाद के अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा लिए। जांच में सामने आया कि खातों में रकम पहुंचते ही उसे तुरंत निकाल लिया गया। बाद में आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया और लोन की प्रक्रिया भी रोक दी।

संदिग्धों के नाम और जांच

वकील रोहित जैन की शिकायत में शब्बीर अहमद, अय्यर स्वामी सेट्टी और अब्दुल मुनीर शेख समेत कई संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। पुलिस बैंक खातों, लेन-देन, फर्जी कंपनियों और पूरे नेटवर्क की तकनीकी व वित्तीय जांच कर रही है। हाईप्रोफाइल ठग का संबंध एक्टर और नेताओं से भी बताया जा रहा है।

अन्य मामलों में गिरोह की संलिप्तता

इसी गिरोह ने एक अन्य कारोबारी से 10 करोड़ रुपये की ठगी की थी। आरोपितों ने पीड़ित कारोबारी को भी इसी तरह झांसे में लिया था। उक्त केस में वकील रोहित जैन ने कोर्ट के माध्यम से राशि रिफंड करवाई थी। इसके बाद पीयूष गुर्जर सामने आए और बताया कि गिरोह ने इसी तरह उनसे भी ठगी की है। आरोपितों ने उनको ठगने के लिए साउथ के कुछ एक्टर और नेताओं से मिलवाया था। पीयूष ने ऑनलाइन आवेदन भी किया था। संभवत: इस गिरोह ने डेटा चुराया है। आरोपित लोन प्रोसेस के बाद कारोबारी को डीडी बनाकर बताते हैं। बैंक पुष्टि करने पर कारोबारी उन पर विश्वास कर लेता है।

साइबर ठगी से बचाव के लिए पुलिस की अपील

पुलिस ने व्यापारियों और आम नागरिकों से अपील की है कि केवल गूगल पर मिले नंबरों या डीएसए के भरोसे लोन प्रक्रिया शुरू न करें। किसी भी वित्तीय संस्था की वैधता की पुष्टि करें, आरबीआइ में उसका पंजीकरण जांचें और लोन के नाम पर अग्रिम ब्याज, सिक्योरिटी या भारी प्रोसेसिंग फीस मांगने वालों से सतर्क रहें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।