बुलंद सोच, इंदौर।
इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय बाघों के जन्म के लिए सबसे उपयुक्त स्थानों में से एक बन गया है। पिछले 10 वर्षों में यहां 25 से अधिक शावकों का जन्म हुआ है।
इन शावकों में से 22 बाघ-बाघिन वयस्क हुए हैं। एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इस चिड़ियाघर से लगभग 20 बाघों को अन्य चिड़ियाघरों में भेजा जा चुका है।
वर्तमान में इंदौर के चिड़ियाघर में 13 बाघ मौजूद हैं।
प्रजनन प्रक्रिया और आवश्यक माहौल
विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों के प्रजनन के लिए तनाव मुक्त माहौल अत्यंत आवश्यक है, जो उन्हें इंदौर के चिड़ियाघर में उपलब्ध कराया जाता है।
बाघ और बाघिन को एक साथ रखने से पहले कई प्रकार की जांच की जाती है। इन जांचों में उनकी ब्लड लाइन और लगभग 10 पीढ़ियों तक की जानकारी शामिल होती है।
दोनों को साथ रखने के लिए इन विस्तृत जांचों का होना अनिवार्य है, जिसके बाद ही उन्हें एक साथ रखा जाता है।
चिड़ियाघर में बाघों का रखरखाव और आगंतुक
इंदौर के चिड़ियाघर में बाघों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है। कुछ बाघ दोपहर में आराम करते हुए और सुबह-शाम घूमते हुए देखे जाते हैं।
हर साल बड़ी संख्या में लोग बाघों सहित अन्य प्राणियों का दीदार करने यहां आते हैं। आगंतुकों को, विशेषकर बच्चों को, बाघों को उछल-कूद करते देखना बहुत पसंद आता है।

