बुलंद सोच, भोपाल।

भारतीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने सरकार को किसानों से वार्ता कर उनकी मांगों का समाधान करने की चेतावनी दी है। उन्होंने इसके लिए आज का समय देते हुए कहा कि “कल हमारा होगा”।
प्रमुख मांगें: मूंग उपार्जन और ई-टोकन व्यवस्था
महासंघ की प्रमुख मांगों में मूंग का उपार्जन हर हाल में सुनिश्चित करना और सरकार द्वारा इसकी तत्काल घोषणा करना शामिल है।
इसके साथ ही, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार की मांग भी की गई है, क्योंकि कई स्थानों पर सर्वर डाउन होने से किसानों के ई-टोकन जनरेट नहीं हो पा रहे हैं, जिसके कारण खाद वितरण बाधित हो रहा है।
आंदोलन की रणनीति
शिवकुमार शर्मा ने बताया कि आंदोलन के तहत सबसे पहले चाकघाट को जाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद अन्य चिन्हित स्थान भी अवरुद्ध किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेशभर से किसानों के संदेश आ रहे हैं और सभी आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
मंत्री समूह और किसान प्रतिनिधियों की बैठक
इस बीच, किसानों के साथ चर्चा के लिए गठित मंत्री समूह की बैठक मंत्रालय में प्रारंभ हो गई है। इस समूह में कृषि मंत्री श्री इंदल सिंह कंसाना, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास ंग, और पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर शामिल हैं, जो किसान प्रतिनिधियों से वार्ता कर रहे हैं।
युवा किसानों की भागीदारी और मूंग उपार्जन की स्थिति
शिवकुमार शर्मा ने बताया कि इस आंदोलन में 90% से अधिक युवा किसान शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि किसान जागृत हो चुका है और अपनी बात रखना जानता है।
उन्होंने मूंग की खेती में लगने वाली काफी लागत का उल्लेख करते हुए कहा कि उचित मूल्य न मिलने पर किसान परेशान होते हैं।
वर्तमान में लगभग डेढ़ क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से मूंग का उपार्जन किया जा रहा है, जबकि इसका औसत उत्पादन 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ है।
राजनीतिक संदर्भ और जबलपुर हाईकोर्ट का निर्देश
शर्मा ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि देश के कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं और दोनों राज्यों में एक ही दल की “डबल इंजन” सरकार है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कृषक कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है, तब भी किसान क्यों परेशान हैं, इसे सोचने वाली बात बताया।
एक अन्य संबंधित घटनाक्रम में, जबलपुर हाईकोर्ट ने हाथियों द्वारा फसल उजाड़ने पर किसानों को नुकसान क्यों भुगतना पड़े, इस पर सख्ती दिखाते हुए सरकार को चार सप्ताह के भीतर मुआवजा नीति बनाने के निर्देश दिए हैं।

