बुलंद सोच, भोपाल।
मध्य प्रदेश में मानसून सीजन का आधे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बारिश का ग्राफ सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। प्रदेश में अब तक 16.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से 18 प्रतिशत कम है। इस स्थिति के कारण अधिकांश जिलों में सूखे जैसी स्थिति बनने लगी है और खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
प्रदेश के कुल 55 जिलों में से 49 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। केवल छह जिलों में औसत से अधिक वर्षा हुई है।
भोपाल, जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। वहीं, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
राजधानी भोपाल में सामान्य से 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इंदौर में 2 प्रतिशत, उज्जैन में 14 प्रतिशत और जबलपुर में 29 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। ग्वालियर एकमात्र बड़ा शहर है, जहां औसत से 7 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 413.3 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 507.2 मिलीमीटर वर्षा हो जानी चाहिए थी। इस प्रकार, करीब 94 मिलीमीटर पानी कम बरसा है। जून के बाद जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश होने से पूरे मानसून का औसत अब तक संतुलित नहीं हो पाया है।
आगामी तीन दिनों में तेज बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश का अनुमान जताया है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, जबलपुर, रीवा, सागर सहित कई जिलों में हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है। इसके प्रभाव से प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत रहा, तो मानसून की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

