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2026-08-14

मध्य प्रदेश में भारी बारिश के बीच शिक्षकों को ई-अटेंडेंस में राहत

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्यप्रदेश में भारी बारिश के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और छात्रों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अब शिक्षकों को उफनती नदियों और नालों को पार कर स्कूल पहुंचने की कोशिश करने के बजाय इसकी सूचना प्राचार्य और संकुल प्राचार्य को देनी होगी। विभाग द्वारा ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल पहुंचने में असमर्थ शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकेगी। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश के दौरान शिक्षक या विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर स्कूल न पहुंचें। यदि कोई नदी-नाला उफान पर है या रास्ता बंद है, तो शिक्षक इसकी जानकारी विद्यालय के प्राचार्य और संकुल प्राचार्य को देंगे।

ई-अटेंडेंस के नियम और चेतावनी

सामान्य दिनों में शिक्षकों और कर्मचारियों को सुबह 10:30 बजे तक ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। विभाग ने इस समय सीमा में 15 मिनट का ग्रेस पीरियड भी रखा है, हालांकि रोजाना देरी को इस छूट की आड़ में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयुक्त ने यह स्पष्ट किया है कि समय पर स्कूल पहुंचना और पठन-पाठन में शामिल होना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। लगातार लापरवाही पाए जाने पर वेतन कटौती भी की जा सकती है। हालांकि, यदि किसी शिक्षक के विद्यालय का समय अलग है या किसी विशेष परिस्थिति में समय आगे-पीछे होता है, तो इसकी जानकारी प्राचार्य के संज्ञान में देने को कहा गया है।

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बैरसिया में समस्या और संगठनों की मांग

लगातार बारिश के कारण बैरसिया क्षेत्र में कई नदी-नाले उफान पर आ गए हैं, जिससे ईंटखेड़ी-बैरसिया मार्ग पर भी पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। इस कारण कई शिक्षक अपने विद्यालयों तक नहीं पहुंच पाए और ई-अटेंडेंस भी दर्ज नहीं कर सके। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने मांग की है कि प्राकृतिक आपदा और भारी बारिश के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाने वाले शिक्षकों को ई-अटेंडेंस में राहत दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी अनुपस्थिति को जानबूझकर की गई लापरवाही मानकर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उपेंद्र कौशल ने दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले सरकार से शिक्षकों के लिए सुरक्षित आवागमन, आवास और विशेष ग्रामीण भत्ते जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों में काम कर रहे शिक्षकों पर केवल नियम लागू करने के बजाय उनकी वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

तकनीकी समस्याओं का समाधान

विभाग ने ‘शिक्षक’ आवेदन में अवकाश का विकल्प नहीं आने समेत अन्य तकनीकी समस्याओं पर भी कदम उठाने की बात कही है। शिक्षक संगठनों से चार सदस्यों की एक टीम बनाने को कहा गया है, जो लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय की तकनीकी टीम के साथ मिलकर इन समस्याओं का समाधान करेगी।