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2026-07-25

मध्य प्रदेश में सितंबर-अक्टूबर 2026 में हिरण-नीलगाय पकड़ने का अभियान फिर चलेगा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, शाजापुर।

मध्य प्रदेश सरकार किसानों को फसलों का नुकसान पहुँचाने वाले हिरण और नीलगायों को पकड़ने के लिए एक बार फिर विशेष रेस्क्यू अभियान चलाने जा रही है। यह अभियान सितंबर-अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित है। इस अभियान के तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहाँ वन्यजीवों के कारण किसानों को सर्वाधिक नुकसान होता है। बुधवार को विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सामने आई।

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विधानसभा में प्रश्नोत्तर

कालापीपल विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने सरकार से पूछा था कि वर्ष 2025 में कालापीपल क्षेत्र में बोमा तकनीक के माध्यम से चलाया गया पायलट प्रोजेक्ट कितना सफल रहा और क्या भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रखे जाएँगे। इसके जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि सरकार आगामी सीज़न में फिर से रेस्क्यू अभियान शुरू करेगी।

पूर्व अभियान और बोमा तकनीक

दरअसल, शाजापुर जिले में पिछले वर्षों में हिरण और नीलगायों की बढ़ती संख्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी, जिससे कई गाँवों में रातों-रात खेतों की फसलें चौपट हो जाती थीं। इसी समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2025 में वन विभाग ने दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम के सहयोग से एक अनूठा अभियान चलाया था। 15 अक्टूबर से शुरू हुए इस अभियान में विशेष ‘बोमा तकनीक’ का उपयोग कर वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया था। करीब 21 दिन तक चले इस अभियान का समापन 4 नवंबर को हुआ था। इस अभियान के दौरान कुल 913 वन्यजीवों को पकड़ा गया, जिनमें 846 काले हिरण और 67 नीलगाय शामिल थीं। बाद में इन वन्यजीवों को सुरक्षित वन क्षेत्रों और अभयारण्यों में स्थानांतरित किया गया।

व्यवस्थित संचालन और लाभ

इस अभियान को प्रदेश में वन्यजीव प्रबंधन के सबसे बड़े प्रयासों में से एक माना गया था। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आगामी अभियान को और व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाएगा। वन विभाग मौसम, वन्यजीवों की संख्या और प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने के बाद अभियान की रूपरेखा तय करेगा। इस अभियान से फसलों को हिरण और नीलगाय से होने वाला नुकसान कम होगा, किसानों की आर्थिक हानि में कमी आएगी, तथा वन्यजीवों और किसानों के बीच टकराव घटेगा। वन्यजीवों को सुरक्षित जंगलों और अभयारण्यों में भेजा जाएगा, जिससे खेतों में रात के समय निगरानी की ज़रूरत कम होगी। साथ ही, कृषि उत्पादन और पैदावार में सुधार की संभावना बढ़ेगी, जिससे वन्यजीव संरक्षण और किसान हित, दोनों को संतुलित लाभ मिलेगा।