बुलंद सोच, जबलपुर।
मध्य प्रदेश में इस वर्ष कम बारिश का सीधा प्रभाव प्रदेश के बिजली क्षेत्र पर पड़ा है। कम बारिश के कारण बिजली की मांग में लगभग 30% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ जलविद्युत (हाइडल पावर) का उत्पादन घटकर लगभग एक-चौथाई रह गया है। ये आंकड़े वेस्टर्न रीजनल लोड डिस्पैच सेंटर (WRLDC, मुंबई) की रिपोर्ट के आधार पर सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता और अधिवक्ता राजेंद्र अग्रवाल ने जारी किए हैं।
बिजली की मांग में रिकॉर्ड वृद्धि
जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग और कुल खपत में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है।
28 जुलाई 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 10,395 मेगावॉट थी, जो 28 जुलाई 2026 को बढ़कर 13,471 मेगावॉट पर पहुँच गई।
यानी, मात्र एक साल में मांग में 3,076 मेगावॉट की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, पिछले साल 28 जुलाई को 22 करोड़ 32 लाख यूनिट बिजली की आपूर्ति हुई थी, जो इस साल बढ़कर 28 करोड़ 74 लाख यूनिट हो गई। इसमें करीब 30% का उछाल दर्ज किया गया है।
जलविद्युत उत्पादन में भारी गिरावट
कम बारिश के कारण बांधों और जलाशयों में पानी कम होने से जलविद्युत उत्पादन को बड़ा झटका लगा है।
पिछले साल 28 जुलाई को जलविद्युत परियोजनाओं से 4 करोड़ 93 लाख यूनिट बिजली बनी थी।
इस साल 28 जुलाई को यह उत्पादन गिरकर महज 1 करोड़ 17 लाख यूनिट रह गया, जो कि पिछले साल की तुलना में लगभग एक-चौथाई (25%) ही है।
महंगी बिजली खरीदने को मजबूर, जनता पर पड़ेगा बोझ
जलविद्युत उत्पादन में आई इस भारी कमी की भरपाई करने के लिए मध्य प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी (NTPC) से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है।
पिछले साल एनटीपीसी से 77 करोड़ यूनिट बिजली खरीदी गई थी।
इस साल यह खरीद दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 180 करोड़ यूनिट तक पहुँच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह महंगी दर पर अतिरिक्त बिजली खरीदने का सीधा आर्थिक बोझ मध्य प्रदेश की आम जनता पर ही पड़ेगा।
ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती का आरोप
राजेंद्र अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि मांग और आपूर्ति में अंतर के कारण प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से अघोषित बिजली कटौती की जा रही है।
उन्होंने मांग की है कि ‘मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी’ बिजली की खरीद, आपूर्ति और कटौती से जुड़े आंकड़े स्वयं सार्वजनिक करे, ताकि जनता के सामने असली तस्वीर साफ हो सके।

