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2026-07-31

सरकार को 3 साल में ₹3346 करोड़ का नुकसान, मूंग खरीदी को लेकर किसान आक्रोशित

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के आसपास के जिलों से मूंग उत्पादक किसान सरकारी खरीदी न होने से नाराज होकर आंदोलित हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से किसान पैदल भोपाल पहुंचे और राजधानी में सीएम हाउस तक आंदोलन कर सरकार से मूंग की सौ फीसदी खरीदी कराने की मांग कर रहे हैं। इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की 60 प्रतिशत मूंग खरीदे जाने की मांग भी मान ली है।

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मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को तीन बार पत्र लिखकर राज्य की मूंग खरीदी का कोटा 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जवाबी पत्र में कहा है कि मध्य प्रदेश को मिले कोटे की 16 जुलाई तक मात्र दो फीसदी मूंग खरीदी हुई है। केंद्र ने मध्य प्रदेश से स्पष्ट कहा है कि पहले अपने कोटे की मूंग खरीदी करें, उसके बाद कोटा बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

केंद्र और मध्य प्रदेश के बीच चल रहे लेटर वॉर की पड़ताल से यह सामने आया है कि मूंग उत्पादक किसान इस बार क्यों इतने आक्रोशित हैं और सरकार की मूंग खरीदी व्यवस्था इस बार क्यों गड़बड़ाई हुई है। देश में सबसे ज्यादा मूंग मध्य प्रदेश खरीदता है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश को 3346 करोड़ रुपए की चपत लगी है।

वित्तीय हानि का अनुमान

मध्य प्रदेश सरकार को कोटे से ज्यादा मूंग खरीदी पर हर साल 1153 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। केंद्र से तय कोटे से ज्यादा मूंग खरीदी करने पर मध्य प्रदेश सरकार को उसकी खरीदी से लेकर उसके परिवहन, वेयरहाउस में भंडारण और बाजार में बेचने के बाद भी नुकसान उठाना पड़ता है।

दस्तावेजों के अनुसार, तीन वर्षों में लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के कारण सरकार को कुल 3,346 करोड़ रुपए की हानि हुई या होने का अनुमान है। यानी औसतन हर साल करीब 1,115 करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है।

कोटा शिफ्ट करने की मांग

मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री से राज्य की मूंग खरीदी का कोटा 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके पीछे मध्य प्रदेश सरकार का तर्क है कि सबसे ज्यादा मूंग खरीदी मध्य प्रदेश में होती है, इसलिए जिन राज्यों में मूंग की खरीदी कम होती है, उन राज्यों का कोटा मध्य प्रदेश को शिफ्ट कर दिया जाए। ऐसे में केंद्र का देश भर से खरीदी के कोटे की लिमिट नहीं बढ़ेगी।

मध्य प्रदेश की मूंग खरीदी की स्थिति

केंद्र सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत मूंग खरीदी के तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) के तुलनात्मक आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग खरीदने वाला राज्य है। प्रदेश में हर साल उत्पादन का करीब 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है, जबकि राजस्थान में यह हिस्सा 5 से 10 प्रतिशत के बीच है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अधिकांश वर्षों में खरीदी का प्रतिशत 3 प्रतिशत से भी कम या शून्य रहा।

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दस्तावेजों के अनुसार, राज्यों के लिए हर वर्ष केंद्र सरकार खरीदी का लक्ष्य (स्वीकृत मात्रा) तय करती है। मध्य प्रदेश के लिए यह लक्ष्य लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2023-24 में 2.76 लाख मीट्रिक टन, 2024-25 में 3.31 लाख मीट्रिक टन और 2025-26 में 3.51 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी की अनुमति दी गई। इसके मुकाबले वास्तविक खरीदी क्रमशः 2.76 लाख, 2.90 लाख और 4.20 लाख मीट्रिक टन रही। यानी 2025-26 में प्रदेश ने स्वीकृत लक्ष्य से भी अधिक मूंग खरीदी की।

इसके विपरीत, राजस्थान में खरीदी का लक्ष्य अधिक होने के बावजूद वास्तविक खरीदी उत्पादन के 10 प्रतिशत के आसपास ही रही। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई वर्षों में स्वीकृति मिलने के बावजूद या तो खरीदी नहीं हुई या बहुत कम हुई।

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मूंग खरीदी, ई-टोकन सिस्टम रद्द करने समेत तीन मांगों को लेकर भोपाल में किसानों का प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी है। समाधान निकालने के लिए मंत्रालय में तीन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसानों के 15 प्रतिनिधियों की बैठक हो रही है। हालांकि, दो घंटे की यह बैठक बेनतीजा रही।