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2026-08-06

मणिपुर में टैंकरों से जबरन वसूली: सीआरपीएफ ने मणिपुर पुलिस को घेरा, राज्य सरकार ने एसओपी समीक्षा का लिया फैसला

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

मणिपुर में, विशेषकर एनएच-37 पर, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी टैंकरों से जबरन वसूली का मुद्दा उठा है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने इस मामले में कथित अवैध वसूली करने वालों की पोल खोली, जिससे मणिपुर पुलिस रडार पर आ गई। यह मामला मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह तक भी पहुंचा।
सीआरपीएफ के मणिपुर एवं त्रिपुरा सेक्टर में आयोजित एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बल के अधिकारियों ने बताया कि वे अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करते हैं। अधिकारियों ने प्रश्न किया कि जब कथित तौर पर मणिपुर पुलिस, एनएच-37 के इम्फाल-जिरिबाम खंड पर रोड ओपनिंग पार्टी और काफिले की ड्यूटी में तैनात ट्रक चालकों से जबरन वसूली करती है, तो वे क्या कर सकते हैं।

राज्य सरकार का कदम

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के संज्ञान में मामला आने के बाद राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) पर जबरन वसूली रोकने के लिए मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा करते हुए उसमें कई संशोधन करने का निर्णय लिया है।
इस उद्देश्य के लिए एक समन्वय समिति का गठन किया गया है, जिसमें राज्य सरकार की एजेंसियों के अलावा सीआरपीएफ को भी शामिल किया गया है। यह समिति तीस दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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पेट्रोलियम संघों का ज्ञापन

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों मणिपुर में पेट्रोलियम, एलपीजी और संबंधित परिवहन/डीलर संघों ने मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में एनएच-37 के इम्फाल-जिरिबाम खंड पर व्याप्त जबरन वसूली का मामला उजागर किया गया था।
संघों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया था कि सीआरपीएफ की सुरक्षा में चल रहे टैंकरों को भी अवैध वसूली का सामना करना पड़ रहा है। सीआरपीएफ अधिकारियों ने भी जुलाई के मध्य में मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह को सौंपे गए इसी ज्ञापन का जिक्र किया था, जिसमें एनएच-37 के इम्फाल-जिरिबाम खंड पर जबरन वसूली का मामला उजागर हुआ था।