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2026-07-31

लोकसभा स्थगित, राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर बहस जारी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच।

संसद के मानसून सत्र का आज नौवां दिन है। विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। वहीं, राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा जारी है।

लोक परीक्षा विधेयक पर चर्चा

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर सवाल किया कि सरकार ने पेपर लीक न होने की क्या गारंटी दी है। उन्होंने बताया कि विधेयक में जुर्माने की राशि एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है और सजा की अवधि भी बढ़ाई गई है। सांसद आजाद ने इसे ‘पेपर लीक विरोधी’ कदम की प्रभावशीलता पर संदेह व्यक्त करते हुए ‘बेकार की बातें’ कहा और जिम्मेदार लोगों को हटाने तथा बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे में गड़बड़ी करते हैं, वे बार-बार वोट चोरी, चढ़ावे के पैसे की चोरी और पेपर लीक के जरिये चोरी करते हैं। माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर कहा कि उन्हें इस विधेयक पर चर्चा करने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने व्यक्त किया कि केवल विधेयक पारित करने से समस्या को कम करने या हल करने में मदद नहीं मिलेगी। सांसद ब्रिटास ने आरोप लगाया कि लिखित परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था और ढांचा भ्रष्ट, अक्षम और पारदर्शिता की कमी वाला है, तथा सरकार से इस व्यवस्था में बदलाव करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसने समस्या का समाधान कर दिया है, जबकि असल मुद्दे को छिपाया जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर कहा कि कड़े और व्यापक कानूनी प्रावधान बनाने के बजाय जवाबदेही तय करना और पारदर्शिता लाना बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे कानूनों में निर्दोष लोग फंस जाते हैं, जबकि दोषी चालाकी से बच निकलते हैं। सांसद माजी ने सुझाव दिया कि कानून बनाए जाने चाहिए, लेकिन उनमें ऐसे कठोर प्रावधान नहीं होने चाहिए कि कोई निर्दोष व्यक्ति इसकी चपेट में आकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर बैठे। उन्होंने जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि जिन कांग्रेस शासित राज्यों में पेपर लीक हुए, उन्हें सबसे पहले वहां के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कार्यकाल में भी कई पेपर लीक हुए, लेकिन तब उन्होंने कुछ नहीं किया, इसलिए उन्हें इस मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। सांसद सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने छात्रों की चिंताओं को सही मायने में समझा है, और उनकी एक अपील के बाद ही छात्रों ने प्रदर्शन स्थल खाली कर दिया। उन्होंने दावा किया कि देश के छात्रों को प्रधानमंत्री पर भरोसा है, राहुल गांधी पर नहीं।

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गृह मंत्री पर आरोप और विपक्ष की मांग

कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर कहा कि विपक्ष के तौर पर सवाल पूछना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन सरकार किसी भी सवाल का जवाब नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि पुलिस गृह मंत्री के अधीन आती है और यही एकमात्र मुद्दा उठाया जा रहा है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गोली चलाने या पैलेट गन से किसी को घायल करने के मामले पर कहा कि इसके लिए किसी न किसी की अनुमति जरूर रही होगी। उन्होंने सवाल किया कि अगर एसडीएम ने इसकी अनुमति दी थी, तो क्या गृह मंत्री ने कभी कहा कि एसडीएम ने गलत काम किया। सांसद सिब्बल ने पूछा कि गृह मंत्री चुप क्यों हैं, और उनकी चुप्पी से लगता है कि यह सब उनकी सहमति से हुआ। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता, तो वह सार्वजनिक रूप से कहते कि एसडीएम ने गलत फैसला लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि भाजपा ने शुरुआत में पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था, लेकिन जब राहुल गांधी ने लोगों के चेहरे और शरीर पर लगी चोटें दिखाईं, तो उन्हें मानना पड़ा कि पैलेट गन चलाई गई थी। सांसद सिब्बल ने गृह मंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेने की मांग की और आरोप लगाया कि वह न तो सदन में आ रहे हैं, न कोई बयान दे रहे हैं और न ही यह स्वीकार कर रहे हैं कि कोई गलती हुई है। माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर कहा कि अगर अमित शाह को छात्रों पर हुई गोलीबारी या उनके साथ हुई बर्बर कार्रवाई की जानकारी नहीं थी, तो वह दिल्ली पुलिस का नेतृत्व करने के योग्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें इसकी जानकारी थी और वह इसमें पूरी तरह शामिल थे, तो वह भी दोषी हैं। सांसद ब्रिटास ने मांग की कि किसी भी स्थिति में गृह मंत्री को संसद आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 20 जुलाई को सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई ‘पुलिस कार्रवाई’ को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ किया गया। गृह मंत्री अमित शाह के आज सदन में आने को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हां, उन्हें आना चाहिए।

अन्य विरोध प्रदर्शन

अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

भाजपा का पलटवार

भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि पिछले दो हफ्तों से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि राहुल गांधी के जो भी मुद्दे हैं, उन पर सदन के अंदर चर्चा होनी चाहिए और वहीं तर्क तथा तथ्य रखे जाने चाहिए। सांसद अग्रवाल ने बताया कि शुरुआत में राहुल गांधी ने नीट पर चर्चा की मांग की थी और बाहर प्रदर्शन करते रहे, जबकि सरकार सदन के अंदर चर्चा के लिए तैयार बैठी थी। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और इस्तीफा दे दिया गया। सांसद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि अब राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोली चलाने का आदेश दिया था, जबकि वास्तव में कोई गोली चली ही नहीं, तो फिर गोली किसने चलाई, यह सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी किसी मुद्दे को बेवजह बड़ा बनाकर और जनता में असंतोष फैलाकर अपने निजी हित साधने की कोशिश कर रहे हैं।