BREAKING NEWS
2026-08-06

एमबीबीएस छात्र ने 10 साल की सजा पूरी होने के बाद पढ़ाई फिर शुरू करने की इच्छा जताई

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

दस साल की सजा पूरी करने के बाद एक मेडिकल छात्र ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई दोबारा शुरू करने की इच्छा व्यक्त की है। इसके लिए छात्र ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में आवेदन कर आगे की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति और प्रथम प्रोफ की अंकसूची जारी करने पर जोर दिया है। विश्वविद्यालय ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया।

Advertisement

समिति की सिफारिश पर, छात्र को आगे की प्रक्रिया के लिए मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस विश्वविद्यालय, जबलपुर भेजा गया है। वहीं, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने छात्र की एमबीबीएस प्रथम प्रोफ की मार्कशीट जारी कर दी है।

छात्र ने वर्ष 2013-14 में एक निजी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। इसी दौरान छात्र एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया और उसे 10 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई गई थी।

जेल में रहने के दौरान, उच्च न्यायालय के निर्देश पर डीएवीवी ने उसे एमबीबीएस प्रथम प्रोफ की परीक्षा देने की अनुमति प्रदान की थी। हालांकि, उस परीक्षा का परिणाम रोक दिया गया था।

हाल ही में सजा पूरी होने के बाद, छात्र ने दोबारा आवेदन देकर अपनी पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जताई। साथ ही, उसने अपनी प्रथम प्रोफ की अंकसूची भी मांगी थी। यह मामला कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई, कुलसचिव प्रज्वल खरे और परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी के समक्ष रखा गया। विचार-विमर्श के बाद, विश्वविद्यालय ने छात्र की प्रथम प्रोफ की मार्कशीट जारी कर दी।

विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार, एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश या आगे की पढ़ाई से संबंधित निर्णय अब डीएवीवी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। वर्ष 2014 से, मेडिकल पाठ्यक्रमों का संचालन मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस विश्वविद्यालय, जबलपुर के अधीन किया जा रहा है। इस कारण छात्र की आगे की पढ़ाई और प्रवेश को लेकर अंतिम निर्णय जबलपुर स्थित यही विश्वविद्यालय करेगा।

कुलसचिव प्रज्वल खरे और परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशेष तिवारी ने स्पष्ट किया कि डीएवीवी केवल उस परीक्षा से संबंधित दस्तावेज जारी कर सकता था, जो उसके अधिकार क्षेत्र में आयोजित हुई थी। इसी कारण छात्र को प्रथम प्रोफ की अंकसूची उपलब्ध करा दी गई है। चूंकि डीएवीवी प्रवेश को लेकर कोई फैसला नहीं कर सकता है, इसलिए छात्र को जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय में आवेदन करने की सलाह दी गई है।