बुलंद सोच, इंदौर।

भोपाल की सरकारी प्रयोगशाला में घी के नमूनों में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक लेड (सीसा) और वेजिटेबल फैट (वनस्पति वसा) पाया गया है। इस खुलासे के बाद यह मामला अब केवल खाद्य मिलावट तक सीमित न रहकर जनस्वास्थ्य का एक गंभीर मुद्दा बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, लेड एक विषैला धातु तत्व है, जिसकी कोई भी मात्रा पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती है। यह शरीर में जमा होकर मस्तिष्क, किडनी (गुर्दे), लीवर (यकृत), हृदय और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं में इसका असर अधिक गंभीर होता है, जिससे मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और व्यवहार पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है। वयस्कों में लेड के सेवन से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ता है।
मिलावट का तरीका और पहचान
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर ए.एस. परिहार के मुताबिक, घी में वेजिटेबल ऑयल (वनस्पति तेल) और सोया ऑयल (सोया तेल) की मिलावट की जाती है। नकली घी बनाने वाले वैसलीन जैसे पेट्रोलियम प्रोडक्ट का हाइड्रोजनीशन (हाइड्रोजनीकरण) से उपयोग कर घी तैयार करते हैं। वे घी में 20 से 25 प्रतिशत वेजिटेबल ऑयल मिला देते हैं, जिससे आम आदमी को घी में मिलावट का पता नहीं चलता है। घी के इंग्रेडिएंट्स (सामग्री) में यह बदलाव केवल प्रयोगशाला जांच में ही सामने आता है। ऐसे में आम उपभोक्ताओं के पास विश्वसनीय दुकान अथवा प्रतिष्ठान से ही घी खरीदने का विकल्प है। कई बार बड़े ब्रांड की नकल वाले उत्पाद भी आसानी से बाजार में आ जाते हैं और उनमें मिलावट होती है।
नियमित सैंपलिंग की आवश्यकता
वर्तमान में इंदौर सहित प्रदेश के अधिकांश शहरों में खाद्य एवं औषधि विभाग के पास स्टाफ (कर्मचारी) की कमी है। इसी कमी के कारण यह विभाग घी सहित अन्य खाद्य पदार्थों की नियमित जांच नहीं कर पाता है। यदि नियमित सैंपलिंग (नमूना जांच) की जाए, तो घी सहित अन्य उत्पादों में मिलावट करने वालों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। कई बार अधिकारी केवल शिकायत होने के बाद ही सैंपलिंग के लिए पहुंचते हैं, जबकि अधिकारियों को बाजार में जाकर हर नए ब्रांड का सैंपल लेना आवश्यक है।
लेड के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. एच.पी. यादव के अनुसार, यदि घी में लेड पाया जाता है, तो यह जहरीला है। इसके सेवन से आम लोगों को पेट दर्द की शिकायत हो सकती है, वहीं किडनी पर भी असर पड़ सकता है। लेड के कारण खून की कमी (एनीमिया) हो सकती है और मस्तिष्क, मांसपेशियों व नसों की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डॉ. यादव ने बताया कि लेड के सेवन से बच्चों की ग्रोथ (विकास) भी रुक जाती है।
सागर में मिलावटी घी बेचने वाला पकड़ा गया
सागर में डॉक्टरों ने 400 रुपये प्रति किलोग्राम में मिलावटी घी बेच रहे एक व्यक्ति को पकड़ा है, जिसके बाद खाद्य विभाग ने सैंपल प्रयोगशाला भेजे हैं।

