बुलंद सोच, इंदौर।

इंदौर निवासी 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार का जीवन बीमारी के कारण पूरी तरह बदल गया है। दोनों किडनी खराब होने के बाद वे पिछले चार साल से डायलिसिस पर हैं।
जितेंद्र मूल रूप से अशोक नगर के निवासी हैं। साल 2017 में वे रोजगार की तलाश में इंदौर आए थे और यहां इलेक्ट्रिशियन का काम करने लगे। काम के दौरान होने वाली थकान और दर्द के कारण उन्होंने पेनकिलर लेना शुरू कर दिया था।
जितेंद्र के अनुसार, लगभग एक महीने तक लगातार पेनकिलर का सेवन करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। साल 2021 से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ीं और डॉक्टरों ने उन्हें दोनों किडनी खराब होने की जानकारी दी।
वर्तमान में उन्हें सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। उन्होंने भोपाल और अहमदाबाद में भी अपना इलाज कराया है। कई बार डायलिसिस में उपयोग होने वाला डाइलाइजर, ट्यूबिंग और केमिकल उपलब्ध न होने पर उन्हें यह सामान स्वयं खरीदना पड़ता है। बीमारी का असर इतना है कि वे लगभग आधा किलोमीटर भी ठीक से नहीं चल पाते।
बीमारी के कारण जितेंद्र के लिए नौकरी करना मुश्किल हो गया था। वे परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर कई बार रातभर सो नहीं पाते थे। उनके पिता मुन्नालाल विश्वकर्मा फर्नीचर का काम करते हैं और परिवार की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं पर है। उनका छोटा भाई भी उनके साथ रहता है।
परिवार पर आर्थिक बोझ कम करने के उद्देश्य से जितेंद्र रोजगार की तलाश में कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे। अधिकारियों ने उनकी बीमारी और बार-बार अस्पताल जाने की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें नौकरी के बजाय स्वयं का काम शुरू करने की सलाह दी।
इसके बाद रेडक्रॉस के माध्यम से उन्हें 20 हजार रुपए की सहायता मिली, जिससे उन्होंने फल का ठेला खरीदा। हालांकि, इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई और उन्हें लगभग डेढ़ महीने अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।
अस्पताल से लौटने के बाद ठेले पर फल लगाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। ऐसी स्थिति में महाकाल संस्था के जय्यु जोशी और करीम खान ने उन्हें 10 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी। इस सहायता से जितेंद्र ने ठेले पर फल रखना शुरू किया और दोबारा अपना काम शुरू किया।
जितेंद्र का कहना है कि बीमारी ने उनके शरीर को कमजोर जरूर किया है, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी उठाने का हौसला अभी भी कायम है। उन्होंने बताया कि वे जितना संभव होगा, उतना काम करेंगे और परिवार के लिए अपने पैरों पर खड़े होने का प्रयास जारी रखेंगे।

