बुलंद सोच, सागर।

मध्यप्रदेश में निजी बस संचालकों ने बस किराया बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। बस ऑपरेटर्स ने डीजल की बढ़ती कीमतों, महंगे रखरखाव और संचालन लागत का हवाला दिया है। ऑपरेटर्स ने चेतावनी दी है कि यदि 7 अगस्त तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में बसों का संचालन बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। इस संबंध में रविवार को सागर में प्रदेशभर के बस ऑपरेटर्स की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सात सूत्रीय मांगपत्र सरकार के सामने रखा गया।
किराया वृद्धि की मांग का आधार
मध्यप्रदेश बस आनर्स एसोसिएशन के अनुसार, वर्ष 2021 में जब अंतिम बार किराया संशोधित किया गया था, तब डीजल की कीमत करीब 67 से 69 रुपये प्रति लीटर थी। वर्तमान में डीजल 99.32 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है, लेकिन बस किराया आज भी पुराने ढांचे पर ही चल रहा है, जिससे बस संचालन घाटे का सौदा बन गया है।
संचालकों का कहना है कि डीजल के साथ-साथ टायर, स्पेयर पार्ट्स, ग्रीस, इंजन आयल, मैकेनिक, ड्राइवर और कर्मचारियों के वेतन सहित सभी खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है। इसके कारण कई आपरेटर्स अपनी बसों का नियमित रखरखाव तक नहीं करा पा रहे हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होने लगी है।
किराया वृद्धि को लेकर दो बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। जबकि पड़ोसी राज्यों में कई बार किराया बढ़ाया जा चुका है और वहां प्रति किलोमीटर दो रुपये की दर लागू है। ऐसे में मध्यप्रदेश में भी तत्काल किराया संशोधित किया जाना चाहिए। आपरेटर्स ने 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर बसों का किराया बढ़ाने की मांग की है।
राष्ट्रीयकरण और नई व्यवस्थाओं का विरोध
बस संचालकों ने प्रस्तावित राष्ट्रीयकरण का भी विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय निजी बस संचालकों और उनके परिवारों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा तथा हजारों लोगों के रोजगार और नई पीढ़ी के स्वरोजगार के अवसर समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से राजपत्र वापस लेने की मांग की है।
इसके साथ संचालकों ने 6 जुलाई 2026 को जारी रायल्टी वसूली संबंधी टेंडर को भी निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे बस संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
अन्य प्रमुख मांगें
निजी बस आपरेटर्स की मांग है कि जिन वाहनों का पंजीयन पहले ही हो चुका है, उन्हें वैध माना जाए और उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई न की जाए। पंजीयन के लिए तैयार लगभग 1200 बसों का तत्काल पंजीयन किया जाए। उन्होंने मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 110(3) के तहत राज्य सरकार से केंद्र के नियमों में समयबद्ध छूट देने की भी मांग की है।
बस आपरेटरों ने परिवहन विभाग के अधिकारियों पर समय पर कार्यालय नहीं आने और बस संचालकों के कार्य लंबित रखकर परेशान करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा उन्होंने मांग की है कि पूर्व से संचालित बसों पर 15 वर्ष की आयु सीमा समाप्त की जाए और जब तक वाहन की फिटनेस वैध रहे, तब तक उसे परमिट जारी किया जाए।
अतुल दुबे का बयान
जिला बस आपरेटर, सचिव सागर, अतुल दुबे ने कहा कि प्रदेश भर के बस आपरेटरों ने प्रदेश सरकार की राष्ट्रीकरण की नीति का विरोध किया है और उसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में बसों का किराया चार साल से नहीं बढ़ा है, जबकि डीजल के दाम 100 रुपये तक पहुंच चुके हैं। उन्होंने किराया 1.25 रुपये प्रति किमी. से बढ़ाकर 2.50 रुपये करने की मांग की है।

