बुलंद सोच, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। पीठ ने अपीलकर्ता की वृद्धावस्था को देखते हुए कारावास की सजा कम कर दी। साथ ही, पीड़ितों को राहत देने के उद्देश्य से जुर्माने की राशि में कई गुना वृद्धि की गई।
टीकमगढ़ निवासी से जुड़ा मामला
यह मामला टीकमगढ़ निवासी हर प्रसाद यादव से संबंधित है। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी स्वामित्व वाली भूमि को एक बार बेचने के बाद उसी भूमि की दोबारा रजिस्टर्ड बिक्री कर शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की। अपीलकर्ता ने इसे एक सिविल विवाद बताते हुए दोषमुक्त करने की मांग की थी।
न्यायालय का रुख और सजा
हाई कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि दोनों विक्रय पत्रों पर अपीलकर्ता के अंगूठे के निशान मौजूद हैं। न्यायालय ने यह भी कहा कि पहली बिक्री के बाद हर प्रसाद यादव का स्वामित्व समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद दूसरी बिक्री करना एक सुनियोजित धोखाधड़ी थी। कोर्ट ने धारा 420, 467 और 468 के तहत सजा को घटाकर तीन-तीन वर्ष कर दिया। इसके अतिरिक्त, जुर्माने की राशि को बढ़ाकर क्रमशः 20 हजार, 50 हजार और 20 हजार रुपये किया गया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि बढ़ी हुई जुर्माना राशि पीड़ितों को मुआवजे के रूप में दी जाए।

