बुलंद सोच, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप वन्यजीव संरक्षण, विशेषकर मानव-हाथी संघर्ष से जुड़े मामलों के लिए विस्तृत गाइडलाइन तैयार करे।
कोर्ट ने राज्य सरकार के आग्रह पर गाइडलाइन तैयार करने के लिए चार माह का समय दिया। इस मामले की अगली सुनवाई छह माह बाद होगी।
यह निर्देश रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की याचिका पर आया है।
याचिका में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ से जंगली हाथियों के झुंड मध्य प्रदेश के जंगलों में प्रवेश कर किसानों की फसलें नष्ट कर रहे हैं, मकानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और कई मामलों में जनहानि भी हुई है।
याचिका में यह भी कहा गया कि हाथियों को पकड़ना अंतिम विकल्प होना चाहिए, जबकि प्रदेश में इसे प्राथमिक उपाय के रूप में अपनाया जा रहा है।
पकड़े गए हाथियों को टाइगर रिजर्व भेजकर प्रशिक्षण देने के दौरान उन्हें अनावश्यक पीड़ा पहुंचने का भी आरोप लगाया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि टीएन गोदावरमन थिरुमुलपाड बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन, फसल क्षति के लिए मुआवजा नीति तथा संरक्षण संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
याचिका में इन्हीं दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार को नीति बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

