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मध्य प्रदेश में बाघ-मानव संघर्ष बढ़ा, जनवरी से अब तक 50 ग्रामीण और 45 से अधिक बाघों की मौत

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, जबलपुर।

मध्य प्रदेश बाघों और तेंदुओं की अधिक संख्या के लिए जाना जाता है। हालांकि, लगभग एक वर्ष के दौरान वन्यप्राणियों और मानव के बीच हो रहे संघर्ष ने चिंता उत्पन्न कर दी है। जंगल की सीमा से लगे गांवों में ग्रामीण अक्सर महुआ, जलाऊ लकड़ी, तेंदू पत्ता बीनने या शौच अथवा मवेशियों को चराने के लिए जंगलों में जाते हैं।

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मानव और वन्यप्राणियों की मौतें

इसी वर्ष जनवरी से अब तक पूरे मध्य प्रदेश में करीब 50 लोगों की मौत वन्यप्राणियों के हमलों में हो चुकी है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघों के हमले में ग्रामीणों की मौत हुई हैं। बाघों के अलावा जंगली सुअरों, हाथियों, भालू और तेंदुओं के हमले में भी जानें गई हैं। संकट का एक दूसरा पहलू भी है, जहां 2026 के शुरुआती 8 महीनों में मध्य प्रदेश में 45 से ज्यादा बाघों की भी जान जा चुकी है।

बढ़े खतरे और प्रभावित क्षेत्र

गर्मी के दिनों में बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समुदाय जंगलों में जाते हैं, जिससे उनका वन्यजीवों से आमना-सामना होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी और कटनी जैसे जिलों में लोग जान हथेली पर लेकर जंगल जाते हैं, जहां सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। यह क्षेत्र रुडयार्ड किपलिंग की मशहूर किताब ‘द जंगल बुक’ के मोगली की दुनिया को प्रेरित करने के लिए जाना जाता है। बाघों का घनत्व सबसे ज्यादा होने के कारण बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में भी मौतें दर्ज की गई हैं।

बाघों की मौत के कारण

बाघों की ये मौतें प्राकृतिक कारणों, आपसी लड़ाई, सड़क या रेल हादसों, करंट लगने और शिकार के कारण हो रही हैं।

हाथियों का प्रभाव

छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे पूर्वी जिलों जैसे अनूपपुर, सीधी, शहडोल, डिंडौरी, रीवा, कटनी और उमरिया में हाथियों की आवक सबसे ज्यादा है। ये हाथी ग्रामीणों के घरों में अनाज और खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। अनाज खाने के साथ ही वे लोगों पर हमला भी करते हैं।

मुआवजा और बाघों की संख्या

भाजपा सरकार ने पांच साल में मानव मृत्यु और पशुओं के नुकसान के मुआवजे के रूप में 88.38 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। अकेले 2024-25 में यह आंकड़ा 20.05 करोड़ रुपये को पार कर गया। वर्ष 2022 में हुई राष्ट्रीय गणना पर नजर डालें तो प्रदेश में 785 बाघ रहे, जबकि अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की संख्या अब 980 है।

बाघों का रिहायशी इलाकों में पहुंचना

वयस्क नर बाघ लगभग 50 से 100 वर्ग किलोमीटर के दायरे को अपना ठिकाना बनाता है। आपसी संघर्ष में ताकतवर बाघ कमजोर बाघों को इलाके से खदेड़ते हैं, जिससे वे लंबी दूरी तय करते हुए खेतों, रिहायशी इलाकों और बस्तियों तक पहुंच जाते हैं।

वन विभाग के आंकड़े

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 से 2024-25 के बीच मध्य प्रदेश में जंगली जानवरों के हमलों में 406 लोग मारे गए हैं। इस दौरान 5,804 लोग घायल हुए और पशुओं के शिकार के 72,627 मामले दर्ज किए गए।

अन्य जानकारी

जबलपुर के बरगी बांध को लबालब होने में डेढ़ मीटर की कमी है, और 15 अगस्त तक 421 मीटर जलस्तर पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।