बुलंद सोच, ग्वालियर।
ग्वालियर गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) प्रदेश में रिक्त पदों के मामले में दूसरे स्थान पर है। यहां एमबीबीएस की सीटें 200 से बढ़ाकर 250 कर दी गई हैं, जिससे कॉलेज की व्यवस्था पर डॉक्टरों की कमी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
जीआरएमसी में स्वीकृत 353 फैकल्टी पदों में से 83 पद लंबे समय से खाली हैं, जो लगभग 24 प्रतिशत विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता को दर्शाता है। इससे बढ़ी हुई सीटों के अनुरूप मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना, मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सेवाओं का संचालन एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अन्य प्रमुख कॉलेजों की स्थिति
प्रदेश के चार प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थिति पर गौर करें तो रिक्त पदों के मामले में जबलपुर मेडिकल कॉलेज पहले स्थान पर है। वहां 352 स्वीकृत पदों में से 91 पद, जो लगभग 26 प्रतिशत हैं, खाली हैं।
इसके बाद ग्वालियर का जीआरएमसी 24 प्रतिशत रिक्त पदों के साथ दूसरे स्थान पर है। इंदौर मेडिकल कॉलेज में 405 स्वीकृत पदों में से 74 पद (18 प्रतिशत) रिक्त हैं, जबकि भोपाल मेडिकल कॉलेज में 431 स्वीकृत पदों में से 66 पद (15 प्रतिशत) खाली हैं।
प्रशासनिक प्रयास और चुनौतियां
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं होने के कारण नियुक्तियां नहीं हो पा रही हैं।
इस स्थिति का सीधा असर न केवल मेडिकल छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, बल्कि मरीजों को भी समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पा रहा है। कई विभागों में सीमित डॉक्टरों पर अतिरिक्त कार्यभार है, जिससे नई चिकित्सा सुविधाएं शुरू करने की योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
जीआरएमसी प्रवक्ता डॉ. केपी रंजन ने बताया कि डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के अनुसार नियुक्तियां की जाएंगी।

