बुलंद सोच, जबलपुर।
जबलपुर हाई कोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों की निगरानी करते हुए यूनियन कार्बाइड संयंत्र के आसपास भूजल के अब भी दूषित होने के आरोपों को गंभीरता से लिया है।
न्यायालय ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) को एक विशेषज्ञ समिति गठित कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से भूजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने MPPCB को यह जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ वर्ष 2004 से लंबित एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
यह जनहित याचिका दिवंगत आलोक प्रताप सिंह ने दायर की थी।
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं ने न्यायालय को सूचित किया कि यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीले अपशिष्ट के निष्पादन के बावजूद, आसपास के कई वार्डों में भूजल के दूषित होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
हस्तक्षेपकर्ताओं ने यह भी कहा कि इससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
इन दावों को प्रथमदृष्टया गंभीर मानते हुए, युगलपीठ ने कहा कि वास्तविक स्थिति का पता केवल स्वतंत्र और वैज्ञानिक परीक्षण से ही लगाया जा सकता है।
न्यायालय ने MPPCB को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसमें विशेषज्ञ समिति द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की जांच शामिल हो।
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को निर्धारित की है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर अगली सुनवाई में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खालिद नूर फखरुद्दीन और MPPCB की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने अपना पक्ष रखा।

