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2026-08-03

पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल, हाईकोर्ट में नियम 2025 पर सुनवाई संभव

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

प्रदेश में वर्ष 2016 के बाद पदोन्नतियां प्रारंभ हुईं, किंतु इसे लेकर प्रश्न भी उठ रहे हैं।

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कुछ विभागों में मात्र नोटिस के आधार पर पदोन्नतियां रोकी जा रही हैं, वहीं कुछ विभागों में अनारक्षित श्रेणी के पदों पर पदोन्नतियां नहीं दी गईं।

भारतीय पशु चिकित्सा परिषद ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से की है। उधर, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने भी कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण (सीपीसीटी) की आड़ में पदोन्नति रोकने का आरोप लगाया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच कर उचित कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

पदोन्नति नियम 2025 को लेकर एक-दो दिनों में हाई कोर्ट जबलपुर में सुनवाई हो सकती है।

प्रदेश में बंद पदोन्नतियां फिर से प्रारंभ होने से अधिकारी-कर्मचारी उत्साहित हैं और सभी विभागों में पदोन्नति समिति की बैठकें चल रही हैं।

पशुपालन विभाग में पदोन्नति पर सवाल

पशुपालन एवं डेयरी विभाग में हुई पदोन्नति को लेकर भारतीय पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने आपत्ति की है। उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह बात कही।

पत्र में बताया गया कि 27 जुलाई 2026 को पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ से उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं के 202 पदों के विरुद्ध पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की गई थी।

इस बैठक में लगभग 30 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञों को पूर्व में जारी मात्र कारण बताओ नोटिस के आधार पर पदोन्नति के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया।

इन अधिकारियों के विरुद्ध कोई भी विभागीय जांच संस्थापित नहीं की गई थी और न ही कोई आरोप पत्र जारी किए गए थे।

नियमानुसार, आरोप पत्र जारी होने के बाद ही किसी अधिकारी को पदोन्नति के लिए अनुपयुक्त घोषित किया जा सकता है।

इसके साथ ही अनारक्षित श्रेणी के 14 पदों पर जानबूझकर पदोन्नति की कार्रवाई नहीं की गई, जबकि इस श्रेणी में पर्याप्त संख्या में पात्र अधिकारी पदोन्नति के लिए उपलब्ध थे।

पदोन्नति के बाद पदस्थापना की कार्यवाही में भी अनियमितताओं की सूचना प्राप्त हो रही हैं। इसे देखते हुए पूरे मामले की जांच कराए जाने और विभागीय पदोन्नति की बैठक फिर से करने की मांग की गई है। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को सदस्य के रूप में शामिल करने की भी मांग है।

लोक निर्माण विभाग और सीपीसीटी पर आपत्ति

उधर, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता के पद को लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी सवाल उठ चुके हैं।

जिन अधिकारियों के विरुद्ध जांच थीं, उनकी गोपनीय चरित्रावली भी ‘ए प्लस’ श्रेणी की होने पर आपत्ति उठाई गई थी, जिसके बाद प्रक्रिया रुक गई थी।

सहायक श्रेणी तीन के पदों पर भर्ती में सीपीसीटी की आड़ लेकर पदोन्नति न देने को लेकर तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ सवाल उठा चुका है।