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2026-07-29

ऑक्सीटोसिन दुरुपयोग पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने फल, सब्जियों और पोल्ट्री उत्पादों का आकार बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के कथित दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख सचिव को निर्देश देते हुए पूछा है कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। प्रमुख सचिव से इस मामले में विस्तृत जवाब तलब किया गया है। इस मामले की सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी।

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अवमानना याचिका और पूर्व के निर्देश

यह मामला मिलेनियम प्लाजा निवासी बीपी सिंह राजावत द्वारा अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के माध्यम से दायर अवमानना याचिका में सामने आया। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2013 में हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए मध्य प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए थे कि फल, सब्जियों और चूजों का आकार बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के उपयोग पर सख्ती से रोक लगाई जाए। साथ ही यह भी आदेश दिया गया था कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खुले बाजार में बिक्री बंद की जाए और इसकी बिक्री केवल चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही हो।

खुलेआम बिक्री और स्वास्थ्य चिंताएं

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने कोर्ट को बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद कुछ समय तक कार्रवाई हुई, लेकिन वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आदेश का पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने दलील दी कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन खुलेआम बाजारों और यहां तक कि परचून की दुकानों पर भी उपलब्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि किसान, पोल्ट्री फार्म संचालक और डेयरी संचालक कथित रूप से इसका उपयोग फल, सब्जियों, चूजों और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। बाजार में सामान्य आकार से अधिक बड़ी लौकी, तोरई और अन्य सब्जियां बेची जा रही हैं, जिनमें ऑक्सीटोसिन के उपयोग की आशंका है। ऐसे उत्पादों के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और विभिन्न बीमारियों का खतरा बढ़ने का भी दावा किया गया।

राज्य सरकार से विस्तृत जवाब की मांग

सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि इस संबंध में कलेक्टर ग्वालियर की ओर से जवाब प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल जिला प्रशासन का जवाब पर्याप्त नहीं होगा। अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख सचिव को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और पूछा है कि प्रदेशभर में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के दुरुपयोग और उसकी अवैध बिक्री रोकने के लिए सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है। मामले की अगली सुनवाई में राज्य सरकार को इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।