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2026-08-14

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में होमस्टे की आड़ में आलीशान रिसॉर्ट निर्माण, आईएएस अधिकारी पर आरोप

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, उमरिया।

पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में एक आलीशान रिसॉर्ट के निर्माण में नियमों की अनदेखी की गई है। इसके साथ ही शासन-प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास भी सामने आया है। गुरुग्राम में तैनात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. श्रीनिवास कुमार पर आरोप है कि उन्होंने ग्राम पंचायत से होमस्टे बनाने की अनुमति की आड़ में जंगल के प्रतिबंधित क्षेत्र में रिसॉर्ट का निर्माण कराया।

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वनभूमि और वन्यजीव गलियारे पर प्रभाव

कोर क्षेत्र में राजगढ़ गांव स्थित खसरा नंबर 1841 की जिस भूमि पर यह निर्माण हुआ है, उसका बड़ा हिस्सा वन भूमि बताया जा रहा है। निर्माण में भूमि के रिकॉर्ड की अनदेखी करने के साथ भूमि के वास्तविक उपयोग में भी हेरफेर की गई है। इस निर्माण से वन्यजीव गलियारे की अनदेखी कर वन्यजीवों का जीवन संकट में डाला गया है। वर्तमान जांच में सिर्फ जंगल की जमीन पर अतिक्रमण की ही बात हो रही है, जिस पर अब तक कोई कार्रवाई शासन ने नहीं की है। हालांकि, वनभूमि पर निर्माण से वन्यजीव गलियारे का प्रभावित होना एक बड़ा पक्ष है, जिसकी जांच की जानी चाहिए कि वनभूमि पर निर्माण से वन्यजीवों का मार्ग कितना प्रभावित हुआ है। वन्यजीव विशेषज्ञ अब इसी की मांग कर रहे हैं।

वन्यजीव कार्यकर्ता की मांग

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व की करीब पांच एकड़ भूमि पर बने विवादित रिसॉर्ट का मामला सिर्फ कोर जोन में रिसॉर्ट विवाद की बजाय, राजस्व रिकॉर्ड, निर्माण की वास्तविक प्रकृति और वन्यजीव गलियारे के बीच टकराव का भी है। इसकी जांच इसी रूप में की जानी चाहिए।

होमस्टे अनुमति और वन विभाग की भूमिका

वनभूमि के विशाल भाग पर रिसॉर्ट का निर्माण करने के लिए पंचायत से होमस्टे के नाम पर अनुमति प्राप्त की गई थी। होमस्टे के लिए पंचायत से अनुमति लेकर एक विशाल रिसॉर्ट खड़ा करके भूमि के वास्तविक उपयोग पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया, जिसे एक बड़ा अपराध बताया गया है। यहां यह भी खास है कि होमस्टे के लिए वन विभाग से भी अनुमति लेनी होती है, जबकि इस मामले में कोई अनुमति नहीं ली गई है। इस मामले में पंचायत प्रतिनिधियों को भी संदेह के घेरे में लेना चाहिए, क्योंकि पंचायत ने होमस्टे के लिए अनुमति तो प्रदान कर दी, लेकिन यह नहीं देखा कि उसकी अनुमति का क्या उपयोग किया जा रहा है।

डिप्टी डायरेक्टर का वक्तव्य

पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वीरेंद्र पटेल ने बताया कि राजगढ़ गांव की खसरा नंबर 1841 की जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति वन विभाग ने जारी नहीं की है। उन्होंने यह भी कहा कि यहां निर्माण की जांच की गई है, जिस पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।