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2026-07-23

राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को दिए दो विकल्प

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को दो विकल्प दिए हैं। सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का आरोप है।
यह निर्देश मेघालय सरकार की उस याचिका पर आया है, जिसमें सोनम को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत और मेघालय हाईकोर्ट द्वारा उसे बरकरार रखने के फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने सोनम के वकील से कहा कि अदालत या तो मेघालय सरकार की अपील पर उनकी दलीलें सुनकर गुण-दोष के आधार पर फैसला करेगी, या फिर सोनम को फिलहाल आत्मसमर्पण करने का निर्देश देगी ताकि उससे पूछताछ हो सके और इस दौरान जमानत के मुद्दे पर विचार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि, “आपके पास दो विकल्प हैं। या तो हम गुण-दोष के आधार पर आदेश पारित करेंगे, या हम आपसे आत्मसमर्पण करने को कहेंगे ताकि आपसे पूछताछ कर सकें – इस बीच हम जमानत के मामले पर विचार करेंगे।”
इस पर सोनम के वकील ने निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा और अदालत को सूचित किया कि वह गुरुवार तक अपना जवाब दाखिल करेंगे।

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सोनम के आचरण पर सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने घटना के बाद सोनम के आचरण पर भी सवाल उठाए और इस आरोप पर स्पष्टीकरण मांगा कि उसने पहले यह तर्क क्यों नहीं दिया था कि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए थे।

सॉलिसिटर जनरल की दलीलें

सोनम की जमानत का विरोध करते हुए मेघालय सरकार की ओर से पेश भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि सोनम ने पुलिस के सामने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया था, इसलिए वह बाद में इस आधार पर अपनी गिरफ्तारी को चुनौती नहीं दे सकती कि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी मेमो में कोई भी चूक केवल एक लिपिकीय गलती थी।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने प्रस्तुत किया कि यदि आरोपी रंगे हाथों पकड़ा जाता है, तो गिरफ्तारी के कारण बताने की जरूरत नहीं होती।
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण करता है, तो वह इस आधार का उपयोग नहीं कर सकता कि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं दिए गए। अगर आरोपी खुद पुलिस के पास आता है, तो पुलिस के पास उसे अलग से गिरफ्तार करने का कोई कारण नहीं बनता।