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2026-08-04

राजेंद्र भारती का दावा: घनश्याम सिंह को सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिलाने की पेशकश की गई थी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, दतिया।

दतिया उपचुनाव की मतगणना से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने एक विशेष बातचीत में कई बड़े राजनीतिक दावे किए।

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उन्होंने कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के “रिमोट कंट्रोल” पर काम करने का आरोप लगाया।

राजेंद्र भारती ने दावा किया कि उनकी विधानसभा सदस्यता बचाने के लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट से स्थगन (स्टे) दिलाने का प्रस्ताव भी दिया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।

अपने निष्कासन, भितरघात के आरोपों, उपचुनाव और अपनी राजनीतिक रणनीति पर राजेंद्र भारती ने खुलकर बात की।

राजेंद्र भारती ने कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनने से कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि उनका लक्ष्य उस व्यक्ति की राजनीति को खत्म करना था, जिसने वर्षों तक दतिया में भय और दबाव का माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि 2023 में जनता ने अपने जनादेश से उसे नकार दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ साजिश रची गई और फर्जी मामलों में फंसाकर उन्हें अयोग्य घोषित किया गया, लेकिन उनकी राजनीति समाप्त नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक रहना या न रहना उनके लिए सबसे बड़ी बात नहीं है।

कांग्रेस के भितरघात के आरोपों को राजेंद्र भारती ने पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने 2013 से कांग्रेस के लिए संघर्ष किया है और यदि उन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया होता तो इतने वर्षों तक संघर्ष क्यों करते। उन्होंने आरोप लगाने वालों से पूछा कि उनके चुनावों में फंडिंग किसने की।

राजेंद्र भारती ने आरोप लगाया कि उन पर आरोप लगाने वालों के डॉ. नरोत्तम मिश्रा से पुराने संबंध रहे हैं।

घनश्याम सिंह और डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सांठगांठ के आधार पर राजेंद्र भारती ने बताया कि जब उन्होंने डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ चुनाव आयोग में पेड न्यूज का मामला दर्ज कराया था, तब घनश्याम सिंह का नाम गवाह के रूप में दिया था, लेकिन उन्होंने गवाही देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि आज भी घनश्याम सिंह डॉ. मिश्रा की तारीफ करते हैं और उनके अनुसार वे डॉ. मिश्रा के रिमोट कंट्रोल पर काम कर रहे हैं।

उपचुनाव में कांग्रेस की जीत को राजेंद्र भारती ने जनता का जनादेश और अपने वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि वे 2009 से लगातार डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ लड़ते रहे हैं और एक मजबूत भाजपा नेता को हराने का काम उन्होंने ही किया। उन्होंने घनश्याम सिंह के योगदान पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे वर्षों तक दतिया से दूर रहे और चुनाव भी हारते रहे।

सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिलाने के प्रस्ताव के बारे में राजेंद्र भारती ने बताया कि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उसी दौरान डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कट गया था। उनके वकील के पास डॉ. नरोत्तम मिश्रा के दो वकील पहुंचे और संदेश दिया कि सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिला दिया जाएगा, बस तकनीकी आपत्तियां हटवा दी जाएं। उन्होंने कहा कि उनका मकसद चुनाव रुकवाना था और उन्होंने ढाई साल तक विधायक बने रहने की बात कही, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। राजेंद्र भारती ने कहा कि समय आने पर वे संबंधित वकीलों के नाम भी सार्वजनिक करेंगे।

टिकट को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से रायशुमारी पर राजेंद्र भारती ने बताया कि पार्टी नेताओं ने उनसे चुनाव न लड़ने के लिए कहा था। उनके साथ जो हुआ था, उसके बाद जनता में उनके प्रति सहानुभूति थी। उन्होंने परिवार से किसी को टिकट दिलाने की जिद नहीं की और उनकी इच्छा थी कि किसी योग्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) चेहरे को मौका मिले।

राजेंद्र भारती ने कहा कि उन्होंने पहले ही कह दिया था कि वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते और उनका सुझाव था कि आदेश या किसी अन्य ओबीसी नेता को टिकट दिया जाए। लेकिन जैसे ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, घनश्याम सिंह चुनाव लड़ने पर अड़ गए। उन्हें लगता है कि घनश्याम सिंह को सहयोग का भरोसा दिलाया गया था।

अपने निष्कासन की प्रक्रिया पर राजेंद्र भारती ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कांग्रेस के संविधान में अनुशासन समिति का प्रावधान है और किसी भी कार्रवाई से पहले नोटिस देना चाहिए, दोनों पक्षों को सुनना चाहिए और फिर फैसला होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि यह फैसला किसी दबाव में लिया गया। उन्होंने सवाल किया कि इतनी जल्दबाजी क्यों हुई और किसके प्रभाव में यह निर्णय लिया गया, जिसका जवाब पार्टी नेतृत्व ही दे सकता है।

राजेंद्र भारती ने आरोप लगाया कि दतिया कांग्रेस पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग संघर्ष कर रहे थे, उन्हें लगातार परेशान किया गया, उनके साथी जेल गए और राजनीतिक तथा आर्थिक नुकसान उठाया, लेकिन कुछ लोगों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जनता खुद समझ सकती है कि इसका क्या मतलब है।

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा 6016 वोटों से हार गई।

हार के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी से जब पूछा गया कि आखिर ‘सपूत’ कौन नहीं निकला, तो उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग कांग्रेस के षड्यंत्र का शिकार हुए।

वहीं, कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने दावा किया कि भीतरघात के बावजूद वे जीत गए।

मध्यप्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आने से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस ने दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था। यह आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने जारी किया था।